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हापुड़/एक बार फिर से जंग का देवनंदिनी अस्पताल में आ गया है। अस्पताल में एक महिला की मौत के बाद तूफान ने तबाही मचा दी। अब्दुल्ला ने अस्पताल में प्रशासन पर गंभीर बीमारी और इलाज के आरोप लगाए हैं।
मृत महिला के मुर्दाघर का आरोप है कि इलाज के दौरान अस्पताल के कर्मचारियों ने न तो केवल दवाइयां शुरू कीं, बल्कि मौत के बाद जब मुर्दाघर ने सवाल उठाया, तो कर्मचारियों ने इलाज शुरू कर दिया। वास्तविकता पर मौजूद लोगों के, अस्पताल के कर्मचारी और परिजनों के बीच ज़ोर-ज़ोर से धक्का-मुक्की और स्टैण्डर्ड हुई।
रो-रो कर नामित आपबीती
मृत महिला के बहुमुखी उद्यम हैं। उन्होंने मीडिया में खुलासा करते हुए बताया कि अगर समय पर सही इलाज और गुणवत्ता दिखाई दी, तो उनकी बहन/पत्नी/मां की जान बचाई जा सकती थी। फैजाबाद ने डॉक्टर और स्टाफ पर बदसालुकी और धमाके के भी आरोप लगाए।
प्रशासन मौन, जिम्मेदार कौन?
घटना के बाद भी अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं आया। वहीं, पुलिस प्रशासन ने शांतिभंग की कोशिश के बाद मामूली पूछताछ की, लेकिन पीड़ित परिवार की कार्रवाई की मांग की गई।
देवनंदिनी अस्पताल में पहले भी हुई थीं ऐसी घटनाएं।
क्या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जांच क
रते हैं।






