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देश में अब पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर बिक्री की जा रही है, जिससे कच्चे तेल के आयात में कमी और सरकारी खजाने में बचत होने की उम्मीद है। इसके अलावा, यह किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद करेगा। हालांकि, विशेषज्ञों और सर्वे के अनुसार, इससे पुरानी गाड़ियों के माइलेज और प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
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⛽🔥 भारत में E20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से पुरानी गाड़ियों को खतरा, माइलेज और इंजन पर असर 🔥⛽
📢 नई दिल्ली:
देश में अब पेट्रोल में एथेनॉल (E20) मिलाकर बेचा जा रहा है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात में कमी, सरकारी खजाने में बचत और किसानों की आय बढ़ाना है। लेकिन LocalCircles के ताजा सर्वे के अनुसार, 2022 या उससे पहले बनी पुरानी पेट्रोल गाड़ियां इस फ्यूल से प्रभावित हो रही हैं।
सर्वे में खुलासा हुआ कि E20 के इस्तेमाल से:
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माइलेज घट रही है
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इंजन में खराबी और जंग आने की संभावना बढ़ गई है
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रबर-प्लास्टिक पार्ट्स जलने या खराब होने लगे हैं
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कुछ मामलों में इंजन फेल होने का खतरा
🛠️ सरकार की नई पहल:
सरकार ने 1 अप्रैल से बिकने वाले पेट्रोल में न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) 95 लागू करने का फैसला किया है।
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ज्यादा ऑक्टेन वाला फ्यूल इंजन के लिए सुरक्षित माना जाता है।
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इससे इंजन में नॉकिंग (खट-खट की आवाज) का खतरा कम होता है।
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नॉकिंग तब होती है जब इंजन के अंदर फ्यूल ठीक से नहीं जलता, जिससे लंबे समय में इंजन को भारी नुकसान हो सकता है।
📊 सर्वे के नतीजे:
1️⃣ माइलेज में कमी
| माइलेज में गिरावट | प्रतिशत उत्तरदाता |
|---|---|
| 20% से ज्यादा | 25% |
| 15–20% | 7% |
| 10–15% | 13% |
| 1–2% | 7% |
| कोई असर नहीं | 27% |
| कोई जवाब नहीं | 21% |
| कुल उत्तरदाता | 24,710 |
2️⃣ मरम्मत की जरूरत
| मरम्मत की आवश्यकता | प्रतिशत उत्तरदाता |
|---|---|
| नहीं | 60% |
| हां, परेशानी हुई | 29% |
| कोई जवाब नहीं | 12% |
| कुल उत्तरदाता | 25,686 |
⚠️ एक्सपर्ट्स की चेतावनी:
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2023 से पहले बनी गाड़ियों में E20 के लिए जरूरी इंजन बदलाव नहीं होते।
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E20 इस्तेमाल से इंजन में जंग, रबर-प्लास्टिक पार्ट्स की खराबी, और माइलेज में कमी हो सकती है।
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कुछ मामलों में इंजन फेल होने का जोखिम भी बताया गया है।






