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Noida की साइबर पुलिस ने Indian Cyber Crime Coordination Centre और National Payments Corporation of India के साथ मिलकर नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान लाइव साइबर ठगी के मामलों में तुरंत हस्तक्षेप कर देशभर के 122 लोगों को ठगी का शिकार होने से बचाया गया।
नोएडा: Noida पुलिस की साइबर सुरक्षा इकाई ने एक व्यापक और तकनीक-आधारित अभियान चलाकर देशभर के 122 लोगों को ‘लाइव’ साइबर ठगी से बचाने में सफलता हासिल की। यह विशेष ऑपरेशन नवंबर 2025 से 20 फरवरी 2026 के बीच चलाया गया। इस दौरान पुलिस ने केवल शिकायतों पर निर्भर रहने के बजाय सक्रिय (प्री-एम्प्टिव) रणनीति अपनाई। अभियान में Indian Cyber Crime Coordination Centre और National Payments Corporation of India का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
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कैसे पकड़ा गया ठगी का पैटर्न
साइबर सुरक्षा डीसीपी के नेतृत्व में टीम ने एडवांस साइबर और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल कर संदिग्ध बैंक ट्रांजैक्शन, असामान्य फंड फ्लो और बार-बार हो रहे हाई-वैल्यू ट्रांसफर की पहचान की। जांच में पता चला कि ठग सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स और फर्जी वेबसाइट्स के जरिए लोगों को शेयर ट्रेडिंग, आईपीओ, क्रिप्टो और हाई-रिटर्न निवेश योजनाओं का लालच दे रहे थे।
कई मामलों में पीड़ितों को नकली ट्रेडिंग डैशबोर्ड दिखाए जाते थे, जिनमें मुनाफा बढ़ता हुआ नजर आता था। जब निवेशक और पैसा लगाने को तैयार होते, तभी रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
सीधे पीड़ितों से किया संपर्क
एनपीसीआई की मदद से संदिग्ध लेनदेन से जुड़े खातों की जानकारी जुटाई गई और संभावित पीड़ितों से सीधे संपर्क किया गया। पुलिस ने उन्हें बताया कि वे एक सुनियोजित साइबर फ्रॉड का हिस्सा बन चुके हैं। कई लोगों ने पहले इस चेतावनी पर भरोसा नहीं किया, लेकिन जब उन्हें लेनदेन का पूरा विश्लेषण समझाया गया तो वे सतर्क हो गए।
तमिलनाडु, गुजरात, तेलंगाना, ओडिशा और राजस्थान सहित कई राज्यों के कुल 122 लोगों की पहचान की गई। इनमें से कुछ लोग महीनों से ठगी के जाल में फंसे थे और लाखों रुपये गंवाने के कगार पर थे।
केस स्टडी 1: ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर
ओडिशा के एक व्यक्ति को खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताने वाले ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी दी थी। उसे कहा गया कि उसके दस्तावेज मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हुए हैं और जांच के नाम पर रकम ट्रांसफर करने का दबाव बनाया गया। नोएडा साइबर टीम ने समय रहते हस्तक्षेप कर उसे सच बताया और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया समझाई।
केस स्टडी 2: फेसबुक निवेश जाल
नोएडा के एक निवासी को फेसबुक पर एक आकर्षक निवेश योजना दिखाई गई। उसने 3.48 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए थे और आगे और रकम भेजने की तैयारी में था। संदिग्ध ट्रांजैक्शन अलर्ट मिलने के बाद साइबर टीम ने तुरंत संपर्क कर उसे रोक दिया, जिससे बड़ा नुकसान टल गया।
सक्रिय और प्री-एम्प्टिव मॉडल
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान साइबर अपराध से निपटने के पारंपरिक मॉडल से अलग था। यहां शिकायत आने के बाद कार्रवाई करने के बजाय, डेटा एनालिटिक्स और रियल-टाइम मॉनिटरिंग के जरिए संभावित पीड़ितों तक पहले पहुंचा गया।
अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठग लगातार नए तरीके अपना रहे हैं, इसलिए आम नागरिकों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी अनजान निवेश योजना, ‘गारंटीड रिटर्न’ या सरकारी कार्रवाई के नाम पर मांगी गई रकम को तुरंत जांचे-परखे बिना ट्रांसफर न करें।
यह ऑपरेशन इस बात का उदाहरण है कि तकनीक, समन्वय और त्वरित कार्रवाई के जरिए ‘लाइव घोटाले’ को भी रोका जा सकता है और लोगों की मेहनत की कमाई बचाई जा सकती है।






