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ब्रिटिश राजकुमार प्रिंस एंड्रयू माउंटबेटन विंडसर का नाम जेफरी एपस्टीन कनेक्शन में फंस गया। सोशल मीडिया पर एक लड़की के साथ उनकी तस्वीर लीक होने के बाद हंगामा मच गया। जांच के दौरान पुलिस उनके घर सादे कपड़ों में पहुंची और आरोपों की पुष्टि होने पर प्रिंस एंड्रयू से उनकी राजकुमार की उपाधि भी वापस ले ली गई।

नई दिल्ली: ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय के छोटे भाई और पूर्व राजकुमार प्रिंस एंड्रयू माउंटबेटन विंडसर को सार्वजनिक पद पर दुर्व्यवहार और कुख्यात वित्तपोषक व यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ उनके संबंधों की जांच के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार होने के बाद इस मामले ने ब्रिटिश मीडिया और सोशल मीडिया पर जोरदार हलचल मचा दी है। प्रिंस एंड्रयू पर आरोप हैं कि उन्होंने अपने सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए ब्रिटेन के शीर्ष सुरक्षा और व्यापारिक दस्तावेजों को एपस्टीन के साथ साझा किया, जिनमें कई देशों के साथ होने वाली ट्रेड डील और निवेश योजनाओं की संवेदनशील जानकारी शामिल थी। ये दस्तावेज सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं और इनके लीक होने से राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।
साथ ही, यह मामला यौन अपराध और मानव तस्करी से भी जुड़ा हुआ है। 17 साल की वर्जीनिया गिउफ्रे ने आरोप लगाया कि एपस्टीन द्वारा मानव तस्करी के बाद जब वह नाबालिग थीं, तब प्रिंस एंड्रयू ने उनके साथ यौन शोषण किया। इस आरोप को लेकर मीडिया में एक तस्वीर भी लीक हुई, जिसमें प्रिंस एंड्रयू और गिउफ्रे एक साथ दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा, एपस्टीन ने प्रिंस एंड्रयू को फंसाने के लिए 26 वर्षीय रूसी महिला की भी व्यवस्था की थी। एपस्टीन के एक ईमेल में कहा गया कि उनकी एक दोस्त “इरीना” 20 से 24 अगस्त के बीच लंदन में रहेगी, और इस दौरान प्रिंस एंड्रयू से मिलने का प्रयास किया गया।
प्रिंस एंड्रयू ने अब तक इन सभी आरोपों का खंडन किया है और गिउफ्रे के साथ ली गई तस्वीर की प्रामाणिकता पर सवाल उठाया है। हालांकि, ब्रिटिश पुलिस और न्यायिक संस्थानों ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। थेम्स वैली पुलिस ने बयान जारी किया कि जांच के तहत उन्होंने नॉरफ़ॉक में 60 वर्षीय प्रिंस एंड्रयू को गिरफ्तार किया है और आरोप हैं कि उन्होंने सार्वजनिक पद का दुरुपयोग किया। ब्रिटेन के अन्य राजघराने के सदस्य, जैसे प्रिंस विलियम और उनकी पत्नी कैथरीन, ने भी इस मामले पर अपनी चिंता जताई है और कहा कि इस खुलासे से वे “गहराई से चिंतित” हैं।
इस पूरे मामले ने ब्रिटेन के राजघराने की छवि को भारी नुकसान पहुँचाया है। प्रिंस एंड्रयू पर लगे आरोपों के चलते उन्हें राजघराने से उनके आधिकारिक पदों और उपाधियों से वंचित कर दिया गया। वहीं, जेफरी एपस्टीन और उनकी सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल के माध्यम से फंसाए जाने वाले मामलों की विस्तृत जांच अभी भी जारी है। इस गिरफ्तारी ने ब्रिटेन में राजसी परिवार के कुछ काले रहस्यों को सार्वजनिक किया है और यह मामला आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में लंबे समय तक चर्चा का विषय बने रहने की संभावना है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि किस हद तक उच्च पदों पर बैठे लोग अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर सकते हैं और उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखना कितना जरूरी है। प्रिंस एंड्रयू का मामला ब्रिटेन में केवल राजकुमार की ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, न्यायपालिका और मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से भी बेहद गंभीर माना जा रहा है।






