⚡ राज्यसभा चुनाव 2026 🏛️: 37 सीटों पर घमासान 🔥, कांग्रेस सतर्क 👀, हरियाणा में सियासी हलचल तेज 🚀


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अप्रैल में खाली हो रही राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को वोटिंग तय है। बीजेपी अपने मजबूत आंकड़ों के चलते बढ़त में नजर आ रही है, जबकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सामने क्रॉस वोटिंग की आशंका बड़ी चिंता बनी हुई है। खासतौर पर हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और बिहार में राजनीतिक गणित जटिल है। ऐसे में विधायकों को एकजुट रखना और विपक्षी तालमेल बनाए रखना कांग्रेस के लिए साख और रणनीति दोनों की कड़ी परीक्षा साबित होगा।

अप्रैल में 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं और इनके लिए 16 मार्च को मतदान होना है। राज्यसभा में संख्याबल के लिहाज से Bharatiya Janata Party लगातार मजबूत स्थिति में पहुंचती दिख रही है, जबकि सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सामने खड़ी है। कई राज्यों में कांग्रेस के पास गणितीय बढ़त होने के बावजूद पिछली बार क्रॉस वोटिंग ने उसके समीकरण बिगाड़ दिए थे। इसी वजह से इस बार पार्टी के लिए सिर्फ चुनाव जीतना ही नहीं, बल्कि अपने विधायकों को एकजुट रखना भी सबसे अहम लक्ष्य बन गया है।

हरियाणा में स्थिति सबसे ज्यादा चर्चा में है। 90 सदस्यीय विधानसभा में एक सीट जीतने के लिए 31 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। यहां बीजेपी के पास स्पष्ट बढ़त है, जबकि कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या होने के बावजूद पिछली बार की तरह क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडरा रहा है। अगस्त 2022 में बहुमत के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार की हार ने पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए थे। ऐसे में इस बार पार्टी पूरी सतर्कता के साथ मैदान में है।

हिमाचल प्रदेश में भी समीकरण उतने आसान नहीं हैं। 68 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत कांग्रेस के पास है, लेकिन 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान अप्रत्याशित क्रॉस वोटिंग ने कांग्रेस को झटका दिया था। इसलिए इस बार यहां भी अंदरूनी एकजुटता और विधायकों की निगरानी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बिहार में 243 सदस्यीय विधानसभा के लिहाज से एक सीट के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। एनडीए का आंकड़ा मजबूत होने के कारण उसकी चार सीटें लगभग तय मानी जा रही हैं। विपक्षी गठबंधन को एक सीट निकालने के लिए पूर्ण एकजुटता दिखानी होगी। खासकर छोटी पार्टियों और सहयोगी दलों की भूमिका यहां निर्णायक बन सकती है।

इन चुनावों का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी साल पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्यसभा चुनाव के जरिए कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि पार्टी के भीतर एकजुटता है और विपक्ष मजबूत तालमेल के साथ आगे बढ़ रहा है। कुल मिलाकर, यह मुकाबला केवल 37 सीटों का नहीं, बल्कि विपक्ष की रणनीतिक क्षमता, संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक विश्वसनीयता की भी बड़ी परीक्षा है।

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