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अगर आप भी सिजेरियन डिलीवरी को लेकर डरती हैं और सोचती हैं कि इससे शरीर बर्बाद हो जाता है, तो आपको गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. शैफाली दधीचि की हालिया सलाह जरूर पढ़नी चाहिए। उन्होंने सिजेरियन से जुड़े मिथक पर अपनी राय दी और बताया कि ये डर कितने हद तक वास्तविक हैं।
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सिजेरियन डिलीवरी को लेकर समाज में आज भी कई गलत धारणाएं फैली हुई हैं। कई महिलाएं सोचती हैं कि इससे शरीर बर्बाद हो जाता है, पेट कट जाता है और घर का काम करना मुश्किल हो जाता है। इस डर के कारण कई महिलाएं सिजेरियन कराने से कतराती हैं, खासतौर पर परिवार की बुजुर्ग महिलाएं।
हाल ही में गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. शैफाली दधीचि के पास एक ऐसा ही मामला आया। जांच के बाद जब उन्होंने महिला को सिजेरियन की सलाह दी, तो महिला की एक रिश्तेदार ने कहा:
“मैडम, सिजेरियन हो जाएगा तो पेट कटेगा, शरीर बर्बाद हो जाएगा और घर का काम कौन करेगा?”
🩺 डॉ. शैफाली दधीचि का जवाब: मिथक और सच्चाई
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डॉ. दधीचि ने कहा कि अगर सिजेरियन से शरीर बर्बाद होता, तो बॉलीवुड एक्ट्रेस, डॉक्टर, इंजीनियर और खिलाड़ी इसे करने के बाद अपनी जॉब कैसे जारी रखते?
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उन्होंने बताया कि नॉर्मल डिलीवरी नैचुरल और बेहतर होती है, लेकिन इमरजेंसी स्थिति में सिजेरियन करना मां और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित होता है।
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⚕️ सी-सेक्शन के बाद देखभाल
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सिजेरियन डिलीवरी में रिकवरी के लिए थोड़ा ज्यादा ध्यान देना पड़ता है।
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टांकों की देखभाल, खाने-पीने में परहेज और कुछ समय के लिए बेडरेस्ट जरूरी होता है।
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आमतौर पर तीन से छह महीने में महिलाएं पूरी तरह रिकवर कर लेती हैं।
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⏰ रूटीन में वापसी
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डॉ. दधीचि के अनुसार, एक से डेढ़ महीने के बाद महिलाएं अपना रूटीन काम शुरू कर सकती हैं।
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अगर किसी को ऑफिस से पूरी मैटरनिटी लीव नहीं मिलती, तो भी डेढ़ महीने बाद जॉइन करना संभव है।
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🥗 स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल का महत्व
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महिलाएं अगर सही लाइफस्टाइल अपनाएं, भरपूर प्रोटीन लें और खुद को एक्टिव रखें, तो रिकवरी समय पर होती है।
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सही देखभाल से न तो शरीर बर्बाद होता है और न ही लंबे समय तक काम न कर पाने की परेशानी आती है।
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🔹 निष्कर्ष
✅ सिजेरियन डिलीवरी से शरीर बर्बाद नहीं होता, बस सही देखभाल और रिकवरी पर ध्यान देना जरूरी है।
✅ महिलाओं को भ्रांतियों से डरने की बजाय डॉक्टर की सलाह माननी चाहिए।
✅ एक से डेढ़ महीने में रूटीन काम शुरू किया जा सकता है और शरीर पूरी तरह स्वस्थ रह सकता है।






