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📅 आज का पंचांग – 16 दिसंबर 2025 | पौष मास, द्वादशी तिथि 🕉️
16 दिसंबर 2025 को पौष मास की द्वादशी तिथि मनाई जा रही है। इस दिन विशेष रूप से धनु संक्रांति का महत्व है, जिसका पुण्यकाल मध्याह्न तक रहेगा।
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आज का स्वाति नक्षत्र दोपहर 02:49 बजे तक रहेगा। इसके बाद विशाखा नक्षत्र का आरंभ होगा।
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धार्मिक कार्यों के लिए आज हनुमान चालीसा का पाठ और चमेली के तेल का दीपक जलाना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
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इस दिन किए गए उपायों और पूजा-पाठ से संपत्ति, स्वास्थ्य और मनोबल में वृद्धि होती है।
🌟 शुभ मुहूर्त:
धनु संक्रांति के पुण्यकाल और नक्षत्रों के अनुसार आज के शुभ समय में धार्मिक अनुष्ठान, पूजा और साधना करना अत्यंत लाभकारी रहेगा।
🔔 टिप:
ध्यान रहे कि सभी कार्य मध्याह्न तक के पुण्यकाल के भीतर करने से विशेष फल मिलता है।

📅 आज का पंचांग – 16 दिसंबर 2025 | पौष मास, कृष्ण द्वादशी 🕉️
राष्ट्रीय मिति: मार्गशीर्ष 25, शक संवत 1947, पौष, कृष्ण द्वादशी, मंगलवार
विक्रम संवत: 2082
सौर मास: पौष प्रविष्टे 02
हिजरी तारीख: 1447 (मुस्लिम)
अंग्रेजी तारीख: 16 दिसंबर 2025
ऋतु: हेमन्त ऋतु, सूर्य दक्षिणायन
🌞 सूर्योदय और सूर्यास्त
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सूर्योदय: सुबह 7:06 बजे
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सूर्यास्त: शाम 5:26 बजे
🌟 तिथि, नक्षत्र और योग
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द्वादशी तिथि: रात्रि 11:58 तक, इसके बाद त्रयोदशी तिथि का आरंभ
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नक्षत्र:
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स्वाति नक्षत्र: अपराह्न 2:49 बजे तक
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विशाखा नक्षत्र: स्वाति के बाद
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योग:
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अतिगण्ड योग: दोपहर 1:23 बजे तक
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सुकर्मा योग: उसके बाद
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करण:
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कौलव करण: पूर्वाह्न 10:40 बजे तक
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गर करण: उसके बाद
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चंद्र राशि: तुला
🕉️ आज के व्रत और त्योहार
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धनु संक्रांति: आज का विशेष व्रत और पुण्यकाल मध्याह्न तक
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इस दिन किए गए पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं।
⏰ शुभ मुहूर्त
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:18 – 6:12 बजे 🌅
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विजय मुहूर्त: दोपहर 2:00 – 2:41 बजे 🏆
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निशीथ काल: रात 11:50 – 12:44 बजे 🌙
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गोधूलि बेला: शाम 5:24 – 5:52 बजे 🌇
⚠️ अशुभ मुहूर्त
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राहुकाल: दोपहर 3:00 – 4:30 बजे ⛔
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गुलिक काल: दोपहर 12:00 – 1:30 बजे
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यमगंड: सुबह 9:00 – 10:30 बजे
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अमृत काल: सुबह 10:59 – 12:16 बजे 🌸
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दुर्मुहूर्त: सुबह 9:11 – 9:50 बजे
🔔 आज के उपाय
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हनुमान चालीसा का पाठ दो बार करें 🙏
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हनुमान जी पर चमेली के तेल का दीपक जलाएं 🕯️
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यह उपाय आज के दिन विशेष रूप से बाल, स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए फलदायी माना जाता है।
🌿 विशेष टिप्स
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आज की तिथि और नक्षत्र अनुसार धार्मिक अनुष्ठान, पूजा और शुभ कार्य करने से संपत्ति, स्वास्थ्य और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
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राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड के समय किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से बचें।
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ब्रह्म मुहूर्त और विजय मुहूर्त के समय किए गए धार्मिक कार्य सर्वाधिक फलदायी होते हैं।






