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साइबर ठग लोगों को ठगने के लिए लैप्स हुई बीमा पॉलिसी का बहाना बना रहे हैं। ये कॉल करने वाले खुद को IRDAI या इंश्योरेंस अधिकारी बता कर लोगों से प्रोसेसिंग फीस और टैक्स के नाम पर पैसे मांगते हैं
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बीमा पॉलिसी लैप्स कॉल्स: साइबर ठगी का नया तरीका, जानें कैसे बचें
हाल के महीनों में कई लोग “सर, आपकी बीमा पॉलिसी लैप्स हो गई है” जैसी कॉल्स का शिकार हो रहे हैं। ठग अब लैप्स हुई पॉलिसियों का बहाना बनाकर लोगों से प्रोसेसिंग फीस, फाइल एक्टिवेशन, NOC, GST, RBI बॉन्ड और अन्य खर्चों के नाम पर पैसा वसूल रहे हैं।
ये कॉल करने वाले खुद को IRDAI या किसी इंश्योरेंस अधिकारी के रूप में पेश करते हैं और पेंडिंग रिफंड दिलाने का झांसा देते हैं। इस झांसे में अक्सर फर्जी गंभीरता और सटीक पॉलिसी जानकारी दिखाकर लोगों को पूरी तरह विश्वास में लिया जाता है।
ठगों का तरीका और शातिराना चाल
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डेटा लीक और मिसयूज:
साइबर ठग अक्सर इंश्योरेंस कंपनी के किसी कर्मचारी या वेबसाइट से डेटा चुराकर इसे मिसयूज करते हैं।
वे पॉलिसी नंबर, प्रीमियम, लैप्स डेट जैसी जानकारी के साथ कॉल करते हैं ताकि ग्राहक को भरोसा हो जाए। -
फर्जी पहचान और कॉल:
ठग स्पूफ्ड नंबर और नकली आईडी का इस्तेमाल कर खुद को IRDAI अधिकारी बताते हैं। -
फर्जी रिफंड का झांसा:
कॉल करने वाले दावा करते हैं कि आपके पास पेंडिंग रिफंड है। इसके लिए प्रोसेसिंग फीस, फाइल एक्टिवेशन, NOC, GST या RBI बॉन्ड जैसी राशि देने की जरूरत है। -
पैसे वसूलने की चाल:
पैसा आमतौर पर बैंक ट्रांसफर, UPI या नकली रिफंड पोर्टल के जरिए लिया जाता है।
ठग बार-बार नए टैक्स या फीस का दावा करते हैं।
एक बार ठगी सफल होने पर कॉल काट दी जाती है और व्हाट्सएप डिलीट कर दिया जाता है।
ताजा मामले: दिल्ली और मुंबई
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दिल्ली: 1.3 लाख रुपये की ठगी, चार लोग गिरफ्तार।
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मुंबई: 2.36 करोड़ रुपये की ठगी, रिटायर शख्स को कॉल करके सात लैप्स पॉलिसियों का रिफंड दिलाने का झांसा दिया गया। ठगों ने ‘RBI क्लीयरेंस’, ‘बॉन्ड फीस’ और टैक्स एडजस्टमेंट’ के नाम पर लगातार पैसे वसूले।
साइकोलॉजिकल दबाव का खेल
IFSO DCP विनीत कुमार के अनुसार, पॉलिसी का लैप्स होना सामान्य है। स्कैमर इस परिस्थिति का फायदा उठाकर 24 घंटे के भीतर रिफंड क्लेम करने की जल्दी दिखाते हैं। इस जल्दबाजी और दबाव की वजह से ग्राहक सोचने का समय नहीं पाता और आसानी से धोखा खा जाता है।
सुरक्षा चेकलिस्ट: कैसे बचें
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IRDAI कभी कॉल नहीं करता: किसी भी बीमा रिफंड के लिए कॉल या प्रोसेसिंग फीस नहीं मांगता।
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कोई टैक्स नहीं लगता: लैप्स पॉलिसी के रिफंड पर GST या TDS जैसी फीस नहीं होती।
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कॉल की पुष्टि: हमेशा बीमा कंपनी के आधिकारिक नंबर पर कॉल वेरिफाई करें।
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पॉलिसी डॉक्यूमेंट सुरक्षित रखें: किसी अनजान शख्स को पॉलिसी नंबर या अन्य डॉक्यूमेंट साझा न करें।
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फ्रॉड रिपोर्ट करें: अगर किसी ठगी का सामना हो, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
महत्वपूर्ण चेतावनी
साइबर ठग डेटा और सटीक जानकारी का इस्तेमाल करके आपको भरोसा दिलाते हैं। यदि कोई कॉल करने वाला प्रोसेसिंग फीस या किसी तरह का भुगतान मांगता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। याद रखें, वास्तविक बीमा कंपनियां कभी भी बैंक डिटेल्स के लिए कॉल नहीं करतीं और रिफंड के लिए कोई फीस नहीं लेतीं।






