“पीली पेशाब दिख रही है? पैंक्रियाज का कैंसर हो सकता है कारण, जानें जुबान पर पढ़ लें ये 6 लक्षण”


Loading

पैंक्रियाज वह अंग है जो ब्लड शुगर नियंत्रित करने वाला इंसुलिन हॉर्मोन बनाता है। अगर पैंक्रियाज में कैंसर हो जाता है तो यह बाइल डक्ट को ब्लॉक कर सकता है। डॉक्टरों के अनुसार पैंक्रियाटिक कैंसर के 6 प्रमुख लक्षण हैं, जिन्हें पहचानकर समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है।

pancreas cancer sign in urine

पेशाब का गहरा पीला होना या मल का रंग हल्का पड़ना अक्सर सामान्य कारणों से जुड़ा माना जाता है, लेकिन कभी-कभी यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या, जैसे पैंक्रियाटिक कैंसर के कारण बाइल डक्ट ब्लॉक होने का संकेत भी हो सकता है। डॉ. अश्विनी कुमार शर्मा, वाइस चेयरमैन – मणिपाल कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर सेंटर ने बताया कि यह बीमारी शरीर में धीरे-धीरे बढ़ती है और समय पर पहचान न होने पर जानलेवा भी हो सकती है। उन्होंने सलाह दी कि मूत्र या मल में होने वाले बदलावों को अनदेखा न करें, क्योंकि इन्हें पहचानकर समय पर इलाज लेना स्वस्थ और लंबा जीवन पाने की कुंजी है।

पैन्क्रिएटिक कैंसर के लक्षण

पैन्क्रिएटिक कैंसर के लक्षण

खाने को पचाने और खून में शुगर का बैलेंस बनाए रखने में पैन्क्रियाज़ का अहम रोल होता है। पैन्क्रियाज़ में कैंसर होने पर बाइल डक्ट ब्लॉक हो सकती है और एंजाइम का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसकी वजह से शरीर में अनेक बदलाव दिखाई देते हैं, लेकिन अक्सर इन संकेतों को सामान्य मानकर नजरंदाज कर दिया जाता है।

मल और पेशाब का रंग बदलना

मल और पेशाब का रंग बदलना

अगर पेशाब का रंग गहरा हो जाता है तो बाइल डक्ट ब्लॉक हो सकता है। इसकी वजह से खून में बाइल पिगमेंट बढ़ने लगता है, जो मूत्र का रंग गहरा पीला या भूरा कर सकता है। इसके अलावा जब बाइल कम हो जाता है तो पाचन पर असर पड़ता है। जिसकी वजह से मल का रंग फीका पड़ना या मिट्टी का रंग होना इसका दूसरा संकेत है।

पीलिया और वेट लॉस

पीलिया और वेट लॉस

यदि आंखें या त्वचा फीकी पड़ रही है, तो यह पैन्क्रिएटिक ब्लॉकेज का शुरुआती लक्षण हो सकता है। यह लक्षण पीलिया के जैसे होते हैं। इसके अलावा बिना वजह वजन में कमी आना या भूख न लगना गंभीर लक्षण हो सकता है। क्योंकि यह शरीर के द्वारा फैट को पचाने या फिर पोषक तत्वों को अवशोषित करने में दिक्कत होने पर होता है।

बेचैनी और दर्द

बेचैनी और दर्द

बढ़ते ट्यूमर के प्रति शरीर की रिएक्शन के कारण पाचन में गड़बड़ी हो जाती है, जिसकी वजह से जी मिचलाता है, उल्टी होती है और लगातार थकान बनी रहती है। यह सभी लक्षण बेचैनी की तरह लगते हैं। इसके दूसरी तरफ जब ट्यूमर नसों और नजदीकी अंगों को प्रभावित करता है, तो पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होता है, जो बढ़ते हुए पीठ तक पहुंच जाता है।

कैसे चलता है पता?

कैसे चलता है पता?

नियमित जांच कराते रहने से पैन्क्रिएटिक कैंसर का समय पर पता चल सकता है, जिससे इसका प्रभावी इलाज कराने में मदद मिलती है। इसका निदान खून की जांच, अल्ट्रासाउंड, सीटी, पीईटी सीटी और एमआरआई की मदद से किया जा सकता है।

पैंक्रिएटिक कैंसर का इलाज

पैंक्रिएटिक कैंसर का इलाज

पैन्क्रिएटिक कैंसर का इलाज सर्जरी, कीमोथेरेपी और इम्युनोथेरेपी द्वारा किया जा सकता है। यदि बीमारी पैन्क्रिया में खास जगह पर हो, तो पैन्क्रिएटिक हेड सर्जरी, पैन्क्रिएटिक बॉडी एंड टेल सर्जरी या पूरी पैन्क्रियाज़ को निकालने के लिए सर्जरी की जा सकती है। हाल ही में सर्जरी के लिए रोबोटिक सर्जरी जैसी अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध हुई हैं, जो ऐसे मामलों में काफी प्रभावशाली साबित होती हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »
error: Content is protected !!
नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 9653865111 हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर