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लड़का या लड़की होने का फैसला शरीर की जटिल जैविक और हार्मोनल प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है। हाल ही में चर्चा में आया है कि क्रिकेटर्स विराट कोहली, रोहित शर्मा और महेंद्र सिंह धोनी की बेटियों के जन्म के पीछे भी यही विज्ञान काम करता है। एक्सपर्ट के अनुसार, माता-पिता की आनुवंशिकी, हार्मोन स्तर और प्रजनन समय जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाएँ यह तय करती हैं कि बच्चा लड़का होगा या लड़की।
कैसे होता है लड़का-लड़की डिसाइड?
डॉक्टर ने बताया कि X क्रोमोजोम फीमेल को रिप्रेजेंट करता है और Y क्रोमोजोम मेल को रिप्रेजेंट करता है। वैज्ञानिक रूप से Y क्रोमोजोम X क्रोमोजोम के मुकाबले ज्यादा नाजुक होता है। महिला के एग में केवल X क्रोमोजोम होता है और पुरुष के स्पर्म में XY क्रोमोजोम, अगर महिला के एग से पुरुष का Y क्रोमोजम मिलता है तो लड़का होता है और X क्रोमोजोम मिलता है तो लड़की होती है।
Y क्रोमोजोम होता है ज्यादा नाजुक
डॉक्टर आगे बताते हैं कि जब पुरुषों का शरीर अत्यधिक स्ट्रेस, इंटेंस ट्रेनिंग या हेवी फिजीकल लोड में होता है तो Y क्रोमोजोम से भरा स्पर्म सबसे पहले डैमेज हो जाता है। जबकि X क्रोमोजोम से भरा स्पर्म के जीवित रहने की संभावना ज्यादा होती है।
डॉक्टर ने क्या कारण बताया?
इन ग्रुप में बेटी होने का पैटर्न ज्यादा
डॉक्टर योकेश अरुल बताते हैं कि कई सारी रिसर्च ने नोटिस किया है कि एथलीट, सैनिक या क्रिकेटर जैसे हाई इंटेंसिटी ग्रुप में बेटी होने का पैटर्न थोड़ा ज्यादा आम होता है।
फुटबॉल प्लेयर्स पर हुई थी रिसर्च
एक साइंटिफिक रिसर्च का और हवाला देते हुए एक्सपर्ट बताते हैं कि प्रोफेशनल फुटबॉल प्लेयर्स पर हुए अध्ययन में रिजल्ट काफी चौंकाने वाले थे। क्योंकि उनमें भी बेटियों का रेशो खासतौर से ज्यादा देखने को मिला था।
डिस्क्लेमर: लेख में दिए गए नुस्खे की जानकारी व दावे पूरी तरह से इंस्टाग्राम पर प्रकाशित रील पर आधारित हैं। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है। किसी भी तरह के नुस्खे को आजमाने से पहले किसी एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।






