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UPSC की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के लिए वैष्णवी पॉल की कहानी एक बड़ी प्रेरणा है। गोंडा की रहने वाली वैष्णवी ने लगातार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और चौथे प्रयास में UPSC CSE 2024 में AIR-62 हासिल कर टॉपर्स की सूची में अपनी जगह बनाई। बचपन से ही प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखने वाली वैष्णवी ने अपने संघर्षों, आर्थिक चुनौतियों और लगातार फेल होने के दबाव को पीछे छोड़ते हुए दृढ़ता और धैर्य के साथ तैयारी जारी रखी। उनका कहना है कि हर अटेम्प्ट ने उन्हें और बेहतर बनने का मौका दिया। कड़ी मेहनत, रूटीन, आत्मअनुशासन और सकारात्मक सोच के दम पर उन्होंने न सिर्फ परीक्षा पास की बल्कि देशभर में 62वीं रैंक लाकर सफलता का बड़ा उदाहरण बन गईं। उनकी सफलता लाखों अभ्यर्थियों को यह संदेश देती है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का नया अवसर है।
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वैष्णवी पॉल की UPSC यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर पढ़ी गई एक पंक्ति भी जीवन बदल सकती है। बचपन में सुनी गई लाइन— “पल भर की सफलता जीवन भर के संघर्ष को भुला देती है” —ने उन्हें कठिन रास्तों पर भी टिके रहने की ताकत दी। लगातार तीन बार असफल होने के बावजूद वैष्णवी न तो थकीं और न ही पीछे हटीं। पांच साल के लंबे संघर्ष, अथक मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बाद उन्होंने चौथे प्रयास में UPSC CSE में AIR-62 हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा किया। उनकी कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो बार-बार की असफलताओं से टूट जाते हैं—क्योंकि वैष्णवी साबित करती हैं कि सफलता उन लोगों को मिलती है जो अंत तक हार नहीं मानते।
बचपन में खुद से कर लिया था वादा
एक इंटरव्यू में वैष्णवी बताती है कि उन्होंने बचपन में ही खुद से IAS बनने का वादा कर लिया था। इसके लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की। उनकी मां टीचर हैं और उन्हीं से मिली प्रेरणा ने वैष्णवी को हर मुश्किल का सामना करने का हौसला दिया। वैष्णवी हमेशा पढ़ाई को सबसे ज्यादा महत्व देती थीं और बचपन से अखबार पढ़ने की आदत ने उनकी सोच को और मजबूत बनाया।
बैचलर्स और मास्टर्स की पढ़ाई यहां से
वैष्णवी ने इंटर तक की पढ़ाई गोंडा जिले के फातिमा स्कूल से कंप्लीट की थी। इसके बाद वह दिल्ली आ गईं और दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्री राम कॉलेज से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन कंप्लीट किया। मास्टर्स की डिग्री के लिए वह जवाहर नवोदय यूनिवर्सिटी (JNU) गईं। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।
बार-बार फेल पर पूरा ही करना था यूपीएससी का सपना
यूपीएससी के पहले अटेंप्ट में वैष्णवी को सफलता नहीं मिली लेकिन वह आगे बढ़ती रहीं। दूसरे प्रयास में भी वह असफल हो गईं। तीसरी बार यूपीएससी की परीक्षा में बैठीं लेकिन असफलता ही मिली। वह बताती हैं कि जब 3 बार यूपीएससी में सक्सेस नहीं मिली तो बुरा लगा लेकिन वह फिर से तैयारी में जुट गईं। 2022 में वह ऑल इंडिया रैंक-62 लाकर यूपीएससी टाॅपर बनीं।
डीएम की एसपी से नहीं…इंटरव्यू में हुआ कुछ ऐसा
IAS इंटरव्यू के दौरान उनसे एक खास सवाल पूछा गया था। ‘अगर आप नई डीएम हों और पिछली डीएम की एसपी से नहीं बनती थी तो आप क्या करेंगी?’ तो इसका जवाब उन्होंने आत्मविश्वास से देकर कहा कि मैं सकारात्मक सोच के साथ शुरुआत करुंगी और आपसी तालमेल पर ध्यान दूंगी।
कैलेंडर की लाइन…जिसने हमेशा किया मोटिवेट
वैष्णवी की इंस्टाग्राम पोस्ट भावुक करने वाली है। उसमें लिखा है कि…’पल भर की सफलता जीवन भर के संघर्ष को भुला देती है’ ये वो लाइनें थीं जो मैंने 11 साल की उम्र में अपने पापा की दुकान पर रखे एक रैंडम कैलेंडर पर पढ़ी थीं। मुझे मुश्किल से ही समझ आया कि इसमें जिस स्ट्रगल और सक्सेस की बात हो रही थी, उसका क्या मतलब है। भले ही मैं इसके मतलब की गहराई का अंदाजा नहीं लगा सका, लेकिन यह लाइन मेरे दिमाग में हमेशा के लिए बस गई। 5 साल और चार कोशिशों में उतार-चढ़ाव मुश्किल सफर था। आज, जब मुझे IAS ऑफिसर के तौर पर अपॉइंटमेंट का मेल मिला तो मेरा मन 11 साल में वापस चला गया। यह खुशी का पल था जिसने मुझे पांच लंबे सालों तक बहाए गए सारे पसीने और आंसुओं को भुला दिया।






