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भवनगर ट्रिपल मर्डर केस में चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब पति द्वारा दर्ज कराई गई पत्नी और दोनों बच्चों की गुमशुदगी की शिकायत की जांच आगे बढ़ी। शुरुआत में मामला एक सामान्य मिसिंग केस जैसा लग रहा था, लेकिन पुलिस की पड़ताल में ऐसे सुराग मिले, जिन्होंने पूरी कहानी को पलट दिया। जांच में सामने आया कि परिवार के गायब होने के पीछे कोई साधारण वजह नहीं, बल्कि एक गहरी साजिश और योजनाबद्ध अपराध छिपा था। जैसे-जैसे साक्ष्य मिलते गए, मामले की सच्चाई बेहद दर्दनाक और हैरान कर देने वाली निकलकर सामने आई।

भावनगर का यह ट्रिपल मर्डर केस शुरू में एक साधारण गुमशुदगी की शिकायत के रूप में दर्ज हुआ था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर यह एक भयावह और योजनाबद्ध हत्या की कहानी में बदल गया। वन विभाग में असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF) शैलेश बच्चू खांभला ने 7 नवंबर को अपनी पत्नी नयना और दोनों बच्चों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वह पुलिस को यह यकीन दिलाने की कोशिश करता रहा कि परिवार अपनी मर्जी से घर छोड़कर चला गया है, लेकिन पुलिस को लगातार उसके बयान और सबूत संदिग्ध लगते रहे।
जांच के दौरान पुलिस को नयना के फोन में एक ऐसा WhatsApp मैसेज मिला, जो भेजा ही नहीं गया था। उसमें लिखा था कि वह अपनी मर्जी से घर छोड़ रही है। मैसेज की भाषा, अंदाज़ और फोन का फ्लाइट मोड में होना पुलिस को यह समझाने के लिए पर्याप्त था कि यह संदेश नयना का नहीं बल्कि शैलेश द्वारा बनाया गया था। इसके साथ ही घर के आंगन में हाल ही में खुदवाए गए दो गहरे गड्ढों ने भी शक को और मजबूत किया।
पूछताछ में आखिरकार शैलेश का झूठ टूट गया और उसने अपने अपराध कबूल करते हुए बताया कि उसने घरेलू विवाद के चलते अपनी पत्नी का गला दबाकर और बच्चों को तकिए से मुंह दबाकर मार दिया। बाद में लाशों को पत्थरों के साथ गड्ढों में दबा दिया और ऊपर से पानी, कूड़ा और मिट्टी भरवा दी। पुलिस ने खुदाई कर तीनों के शव बरामद कर लिए।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि नयना पति के साथ रहना चाहती थी, जबकि शैलेश उसे टालता रहा। इस वैवाहिक तनाव के बीच उसने परिवार से छुटकारा पाने के लिए यह पूरा ‘दृश्यम-स्टाइल’ प्लान रचा था, लेकिन वास्तविक जांच ने उसके हर झूठ को उजागर कर दिया।






