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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) कुल 15 सदस्यों वाला वैश्विक सुरक्षा ढांचा है, जिसमें 5 देश—अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन—स्थायी सदस्य के रूप में शामिल हैं और इन्हें किसी भी प्रस्ताव पर वीटो का विशेषाधिकार प्राप्त है। इसके अलावा, 10 अस्थायी सदस्य दो वर्ष की अवधि के लिए क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए चुने जाते हैं। स्थायी और अस्थायी सदस्यों की यह संरचना वैश्विक शांति, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाती है।
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फ्रांस ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का जोरदार समर्थन किया है और पहली बार इतनी स्पष्टता के साथ यह भी कहा है कि यदि भारत को स्थायी सीट दी जाती है तो उसके साथ वीटो पॉवर भी अवश्य शामिल होना चाहिए। फ्रांस ने कहा कि उसकी स्थिति वर्षों से बिल्कुल स्पष्ट रही है — वैश्विक शक्ति-संतुलन बदल चुका है, और ऐसे में परिषद की संरचना भी नए यथार्थ के अनुरूप बदली जानी चाहिए। फ्रांस ने इस सुधार प्रक्रिया के तहत अफ्रीका को दो स्थायी सीटें देने की सिफारिश की है, क्योंकि महाद्वीप लगातार मानवाधिकार, संघर्ष, आतंकवाद और शांति मिशनों से जुड़े मुद्दों के केंद्र में रहता है।
इसके साथ ही फ्रांस ने ‘ग्रुप ऑफ़ 4’ (G4) — भारत, जापान, जर्मनी और ब्राज़ील — को एक-एक स्थायी सीट देने का आग्रह किया है। फ्रांस का मानना है कि ये चारों देश बड़े लोकतंत्र हैं, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव रखते हैं, और विश्व शांति तथा विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फ्रांस के अनुसार, यदि UNSC वास्तव में 21वीं सदी की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहता है, तो इन देशों को स्थायी सदस्यता और उससे जुड़े सभी अधिकार, विशेष रूप से वीटो, मिलना चाहिए।
भारत पिछले कई दशकों से UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्था है, परमाणु शक्ति है और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सैनिक भेजने वाले देशों में शीर्ष पर है। इसके बावजूद, सदस्य देशों के बीच सहमति न बनने, विशेषकर चीन के विरोध के कारण, भारत अब तक स्थायी सीट हासिल नहीं कर पाया है। चीन बार-बार सुधार प्रक्रिया को धीमा करता है और भारत की उम्मीदों पर बाधा डालता है। वहीं दूसरी ओर, परिषद का मौजूदा ढांचा 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनाया गया था, जब दुनिया का राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य आज की तुलना में बहुत अलग था। पाँच देशों — अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन — को स्थायी सदस्यता और वीटो अधिकार दिए गए थे, जबकि 10 सदस्य दो साल के लिए चुने जाते हैं।
आज वैश्विक व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका, रणनीतिक महत्व, आर्थिक प्रभाव, रक्षा क्षमताएँ और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी मजबूत स्थिति इस बात को और भी स्पष्ट करती है कि UNSC के ढांचे में उसे जगह मिलनी चाहिए। लेकिन सुधार प्रक्रिया वर्षों से ठहरी हुई है और राजनीतिक मतभेद इसकी सबसे बड़ी वजह हैं। फ्रांस के इस नए बयान से भारत की दावेदारी को न सिर्फ मजबूती मिलती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर UNSC सुधार की आवश्यकता पर भी दबाव बढ़ता है।






