डॉक्टर टेरर मॉड्यूल… जानें कैसे बना ये विनाशकारी मिशन


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अब आतंकी ‘जैविक’ और ‘उर्वरक’ धमाकों से लैस होकर आपके इर्द गिर्द बड़े खतरे की तरह मंडरा रहे हैं। ये है देश में कुख्यात ‘डॉक्टर टेरर मॉड्यूल’। एक तरफ जैश-ए-मोहम्मद तो दूसरी तरफ ISKP मॉड्यूल।

Delhi Blast Doctor Terror Module
दिल्ली ब्लास्टः डॉक्टर टेरर मॉड्यूल
नई दिल्लीः अब आतंकी ‘जैविक’ और ‘उर्वरक’ धमाकों से लैस होकर आपके इर्द गिर्द बड़े खतरे की तरह मंडरा रहे हैं। ये है देश में कुख्यात ‘ डॉक्टर टेरर मॉड्यूल ‘। इसी महीने गुजरात एटीएस की गिरफ्त में आए डॉ. अहमद मोईनुद्दीन सैयद का साइनाइड से भी हजार गुना घातक जैविक हथियार ‘रिसिन’ से नरसंहार की तैयारी हो या फरीदाबाद की अल फलाह यूनवर्सिटी से निकले फर्टिलाइजर के कंपोजिशन से शक्तिशाली बम धमाका हो।

साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार

एक तरफ जैश-ए-मोहम्मद तो दूसरी तरफ ISKP (Islamic State -Khorasan Province) मॉड्यूल। लाल किला ब्लास्ट से चंद रोज पहले गुजरात एटीएस ने हैदराबाद के एक डॉक्टर अहमद मोईनुद्दीन सैयद को भारत के कई शहरों में जैविक आतंकी हमले की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसकी निशानदेही पर यूपी के आजाद सुलेमान शेख और मोहम्मद सुहेल सलीम खान को दबोचा।

गुजरात ATS को आतंकियों के पास से ‘रिसिन’ नाम का जहर

गुजरात ATS ने दावा किया कि इनके निशाने पर दिल्ली, लखनऊ और अहमदाबाद थे। इनके पास रिसिन नाम का खतरनाक जहर मिला। गुजरात एटीएस की मानें तो रिसिन एक ऐसा जहर है जो अरंडी के बीजों से तैयार होता है। इसकी मात्रा अगर 1 ग्राम भी हो सैकड़ों लोगों की जान जा सकती है। रिसिन को WHO की कैटिगरी B में बायोटेररिज्म का पदार्थ माना गया है। रिसिन एक बार शरीर के अंदर पहुंच जाए जो 24 से 72 घंटे के भीतर मौत निश्चित है।

आरोपी सैयद भीड़‌भाड़ वाले इलाकों का कर चुका था सर्वे

आरोपी डॉ. सैयद रिसिन तैयार करने की कोशिश कर रहा था। वह दिल्ली के आजादपुर मंडी, अहमदाबाद के नारोड़ा फल बाजार और लखनऊ के भीड़‌भाड़ वाले इलाकों का सर्वे कर चुका था। एटीएस ने उसके पास से दो ग्लॉक पिस्टल, एक बरेटा पिस्टल, 30 कार्टिज और चार लीटर कास्टर ऑयल बरामद किया। जिसे रिसिन बनाने में शुरुआती सामग्री माना जाता है। सैयद कथित रूप से ISKP और पाकिस्तान स्थित हैडलर के संपर्क में था। उसने यह भी बताया कि उसने रिसिन बनाने के लिए रिसर्च शुरू कर दी थी और इसके केमिकल प्रोसेस के लिए जरूरी उपकरण और कच्चा माल जुटा लिया था।

5 नवंबर को डॉ. आदिल अरेस्ट

फरीदाबाद की अल फलाह यूनविर्सिटी। जिसे दिल्ली समेत देश को टारगेट करने के लिए बेस कैंप चुना गया था। इस पूरे मॉड्यूल के खुलासे में अहम रोल है उस पर्चे का जिसे 19 अक्टूबर को कश्मीर के नौगाम में चिपकाया गया था। यह पर्चा जैश-ए-मोहम्मद के नाम से धमकी भरा था। इसके बाद जांच एजेंसियों ने 27 अक्टूबर को शोपियां शहर के मौलवी इरफान को पकड़ा। उसने खुलासा किया कि यह पर्चा डॉ. आदिल ने लिखा है। मौलवी ने डॉ. मुजम्मिल का भी नाम ले लिया, जो फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में था। 30 अक्टूबर को जांच एजेंसी ने मुजम्मिल को अरेस्ट किया। इसके बाद जांच एजेंसी ने 5 नवंबर को डॉ. आदिल को अरेस्ट किया। डॉ मुजम्मिल, डॉ आदिल को गिरफ्तार कर कश्मीर ले जाया जाता है।

3000kg अमोनियम नाइट्रेट फटता तो…

7 नवंबर को अनंतनाग के एक अस्पताल के एक अस्पताल से डॉ. आदिल की एके 47 मिली। डॉ. मुजम्मिल से पूछताछ में पता चला कि अल फलाह यूनिवर्सिटी में उसके कमरे में बगल मे डॉ. उमर का कमरा है। इसके बाद मुजम्मिल की निशानदेही पर डॉ. शाहीन लखनऊ से गिरफ्तार हुई। यह जैश-ए-मोहम्मद की भारत में महिला विंग कमांडर थी। मुजम्मिल के कबूलनामे और शाहीन की गिरफ्तारी के बाद डॉ. उमर विस्फोट से लदी कार को लेकर निकल पड़ा। आधी अधूरी तैयारी के साथ लाल किले पर पहुंचकर आत्मघाती हमला कर देता है। यह था अमोनियम नाइट्रेट से किया गया धमाका। जांच ऐजेसी का मानना है कि 3000 किलो अमोनियम नाइट्रेट अगर एक साथ फटता तो भारी तबाही होती।

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