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अहद अहमद की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत है जो सीमित संसाधनों में रहकर भी बड़े सपने देखने की हिम्मत रखते हैं। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज ज़िले के नवाबगंज इलाके के छोटे से गांव बरई हरख में जन्मे अहद ने अपनी जिंदगी में संघर्ष को बहुत करीब से देखा। उनका घर एक कच्चा मकान था और पिता शाहजाद अहमद की साइकिल रिपेयर की छोटी-सी दुकान ही पूरे परिवार की आय का एकमात्र सहारा थी। परिवार के खर्च पूरे नहीं हो पाते थे, इसलिए उनकी मां ने सिलाई का काम शुरू किया। घर में पांच लोगों का गुजारा मुश्किल से चलता था, लेकिन इन सबके बीच अहद ने कभी अपने सपनों को मरने नहीं दिया।![]()
बचपन में अहद अक्सर अपने पिता के साथ दुकान पर बैठकर पंचर बनाते थे, जबकि घर लौटकर मां के साथ सिलाई का काम करते थे। वे जानते थे कि अगर गरीबी से निकलना है तो शिक्षा ही इसका रास्ता है। तमाम परेशानियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। 2010 में उन्होंने फर्स्ट डिवीजन से 10वीं और 2012 में सेकेंड डिवीजन से 12वीं की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने बीए एलएलबी (ऑनर्स) की पढ़ाई की और 2019 में यह डिग्री हासिल की। यहीं से उनके जीवन का नया अध्याय शुरू हुआ — यूपी पीसीएस जे की तैयारी का।
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कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान जब पूरी दुनिया ठहर गई थी, तब अहद ने इसे अपने जीवन का टर्निंग पॉइंट बना दिया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे किसी कोचिंग संस्थान में दाखिला नहीं ले सके, इसलिए उन्होंने ऑनलाइन मुफ्त कोचिंग क्लासेस का सहारा लिया। उन्होंने दिन-रात एक करके पढ़ाई की, बिना किसी गाइडेंस के खुद अपने रास्ते बनाए।
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आखिरकार 2024 में उन्होंने यूपी पीसीएस जे (UP PCS J) परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में शानदार सफलता हासिल की। अहद ने 157वीं रैंक प्राप्त की और 27 वर्ष की उम्र में जज बनकर अपने माता-पिता और गांव का नाम रोशन कर दिया। आज वे वाराणसी में अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद पर कार्यरत हैं।
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अहद की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार की मेहनत और त्याग की कहानी है। उनके पिता ने साइकिल की दुकान चलाते हुए अपने तीनों बेटों को पढ़ाया। उनकी मां ने सिलाई के काम से परिवार की आर्थिक मदद की। आज अहद जज हैं, उनके बड़े भाई समद सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, और छोटे भाई वजाहत एक निजी बैंक में मैनेजर हैं।
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अहद का कहना है कि “मेरे माता-पिता ने भले ही हमें हर सुख नहीं दिया, लेकिन उन्होंने हमें सपने देखने और उन्हें पूरा करने की आज़ादी दी।” उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर आपके अंदर लगन और आत्मविश्वास है, तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है।
आज अहद अहमद का नाम सिर्फ न्यायपालिका की दुनिया में नहीं, बल्कि उन तमाम युवाओं के दिलों में दर्ज है जो अपनी परिस्थितियों से जूझते हुए आगे बढ़ना चाहते हैं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि “पंखों से नहीं, हौसलों से उड़ान होती है।” गरीबी, संघर्ष और सीमित साधन उनकी राह में बाधा नहीं बने — बल्कि इन्हीं ने उन्हें मजबूत बनाया और जज की कुर्सी तक पहुंचाया।






