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नवरात्र का आज यानी सोमवार को सप्तमी है और मां दुर्गा का पट खुलते ही श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। पटना के कई पूजा पंडालों में मूर्ति नहीं, बल्कि साक्षात लड़कियां देवी बनकर दर्शन देंगी।
उनका पूरा साज श्रृंगार देवी की तरह रहता है। यहां तक कि लड़कियां ही गणेश और कार्तिकेय का रूप धारण करती हैं।
इन लड़कियों की शरीर पर मिट्टी लगाई जाती है, ताकि मूर्ति का स्वरूप दिखे। फिर घंटों मेकअप के बाद वो 10 घंटे एक ही आसन में रहती हैं।
शरीर में किसी तरह की हलचल नहीं दिखती है। इन्हें चैतन्य देवी बोला जाता है। माता के दर्शन के दौरान चैतन्य देवी को देखकर भक्तों को पता ही नहीं चलता है कि देवियों के इस रूप में मूर्ति नहीं लड़कियां हैं।
पटना के डाकबंगला, कंकड़बाग, पटना सिटी में चैतन्य देवी बनने से पहले क्या तैयारी करनी पड़ती हैं। इसके लिए चयन कैसे होता है…भास्कर की इस रिपोर्ट में पढ़िए पूरी कहानी।
पंडालों में मां दुर्गा के नौ रूपों में नौ चैतन्य देवी होती हैं। कहीं दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती को भी बैठाया जाता है। इसके साथ कार्तिक और गणेश भी लोगों को दर्शन देते हैं।

मां का एक स्वरूप चैतन्य देवियों की झांकी के रूप में दिखाते
ब्रह्मकुमारी संस्थान की निदेशिका संगीता ने कहा कि, पटना के अलग-अलग स्थान पर चैतन्य देवियों की झांकी लगाई जा रही है। उनका एक स्वरूप हम चैतन्य देवी की झांकी के रूप में दिखाते हैं।
वो ईश्वरीय संदेश देते हैं कि आत्मा के अंदर जो दिव्य शक्तियां है, विश्व के सर्व आत्माओं में है। सिर्फ उसे पहचानना है और उसे जागृत करना है। जिन्होंने जागृत कर लिया है, उनका स्वरूप हम झांकी के रूप में दिखाते हैं। ब्रह्मकुमारी विश्वविद्यालय के अंदर राजयोगी तपस्वी हैं। हम लोग अपने जीवन को त्याग, तपस्या और सेवा के लिए ही समर्पित रहते हैं। हम अपने जीवन में शक्तियों और गुणों की धारणा राजयोग की तपस्या से कर रहे हैं, आध्यात्मिक ज्ञान के आधार से कर रहे हैं।
आजीवन सात्विक खाना खाने का लेती हैं संकल्प
उन्होंने आगे बताया कि, जो बच्चियां देवी बनती हैं, उनमें यह देखा जाता है कि वह दिव्यता, पवित्रता को अच्छे से फॉलो करती है या नहीं। इसके साथ ही वह दिव्य गुण जैसे- मधुरता, नम्रता, सहनशीलता को अपनाती हैं या नहीं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण सात्विकता है।







