सोना हो गया और सस्ता, फेड की घोषणा से पहले प्रति 10 ग्राम भाव इतने पर आया, जानें चांदी का हाल


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अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आज मौद्रिक नीति की बैठक है, जिसमें की गई घोषणाओं का असर आने वाले दिनों में सोने के भाव पर भी देखने को मिल सकता है।

सोने की कीमतों पर दबाव की मुख्य वजह डॉलर इंडेक्स में 0.10% से अधिक की तेजी है। - India TV Paisa
भारत सरकार पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए एक रक्षा समझौते पर बारीकी से नजर रख रही है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा है कि वह इस समझौते के राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेगा। MEA ने यह भी कहा कि भारत अपनी राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और सभी क्षेत्रों में अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके अनुसार किसी भी देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा।

MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि सरकार को इस बात की जानकारी थी कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे समझौते को औपचारिक रूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार इस घटनाक्रम के राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेगी। बयान में यह भी कहा गया कि सरकार भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा और सभी क्षेत्रों में व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

डॉलर की मजबूती और फेड की उम्मीदें

लाइवमिंट की खबर के मुताबिक, सोने की कीमतों पर दबाव की मुख्य वजह डॉलर इंडेक्स में 0.10% से अधिक की तेजी है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घटती है। हालांकि, बाजार में इस बात की व्यापक उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व आज की बैठक में 25 बेसिस प्वाइंट्स की ब्याज दर कटौती कर सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे चक्र में कुल 75-100 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो लंबी अवधि में सोने की कीमतों को समर्थन मिल सकता है, क्योंकि दरें घटने से गोल्ड एक आकर्षक निवेश विकल्प बन जाता है।

 

 

 

 

2025 में सोने का दमदार प्रदर्शन

सोने ने इस साल अब तक 40% से अधिक की शानदार तेजी दिखाई है। इसकी तीन प्रमुख वजहें रही हैं। एक तो भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक चुनौतियों के कारण निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ा। दूसरा, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में सोने की खरीददारी बढ़ाई है और तीसरी, साल के शुरुआती महीनों में डॉलर में कमजोरी से सोने को मजबूती मिली।

ETF के आंकड़े

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड-बैक्ड ETF, SPDR Gold Trust, की होल्डिंग सोमवार को 976.80 मीट्रिक टन से बढ़कर मंगलवार को 979.95 मीट्रिक टन हो गई, जो निवेशकों के बीच सोने की मांग को दर्शाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस सप्ताह सोने और चांदी दोनों की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव रह सकता है। निवेशकों को फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) के ब्याज दर फैसले, डॉलर इंडेक्स की चाल, और भारत-अमेरिका व्यापार समझौतों से जुड़ी संभावित घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए।

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