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Veer Savarkar Death Anniversary: 26 फरवरी 2026 को क्रांतिकारी नेता Vinayak Damodar Savarkar की 60वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। 1966 में इसी दिन 83 वर्ष की आयु में मुंबई में उनका निधन हुआ था। इस अवसर पर हम उनके जीवन, संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलन में निभाई गई अहम भूमिका से जुड़ी उन महत्वपूर्ण बातों पर नजर डाल रहे हैं, जिनसे आज की युवा पीढ़ी को अवगत होना चाहिए।

🇮🇳🔥🕯️ वीर सावरकर: लंदन में छेड़ी क्रांति, झेली कालापानी की सजा, इतिहास में दर्ज अमिट संघर्षगाथा 🕯️⚔️🇮🇳
📅🌺 60वीं पुण्यतिथि पर विशेष
26 फरवरी 2026 को महान क्रांतिकारी Vinayak Damodar Savarkar की 60वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। 1966 में इसी दिन 83 वर्ष की आयु में मुंबई में उनका निधन हुआ था। उनका जीवन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उस अध्याय का प्रतीक है, जिसमें संघर्ष, साहस, वैचारिक दृढ़ता और विवाद—सभी एक साथ दिखाई देते हैं।
🏠📖 शुरुआती जीवन और राष्ट्रवाद की नींव
28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भागूर गांव में जन्मे सावरकर बचपन से ही राष्ट्रभक्ति के संस्कारों से ओत-प्रोत थे। कम उम्र में माता-पिता का साया उठ जाने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
पिता से उन्होंने रामायण, महाभारत और छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरगाथाएं सुनीं, जिसने उनके मन में स्वतंत्रता का बीज बो दिया। आगे चलकर वे ‘स्वातंत्र्यवीर’ के नाम से प्रसिद्ध हुए और हिंदुत्व विचारधारा के प्रमुख प्रवर्तक माने गए।
🎓🇬🇧 लंदन में क्रांति की नींव – फ्री इंडिया सोसाइटी
पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे 1906 में कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए। लंदन के ग्रेज इन में दाखिला लेने के बाद उन्होंने ‘फ्री इंडिया सोसाइटी’ की स्थापना की।
इंडिया हाउस जल्द ही भारतीय क्रांतिकारियों का गढ़ बन गया। यहां हर रविवार को बैठकों में स्वतंत्रता संग्राम, स्वदेशी आंदोलन और ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ रणनीतियों पर चर्चा होती थी। अंग्रेजों की राजधानी में बैठकर ब्रिटिश शासन को चुनौती देना उस दौर में बेहद साहसिक कदम था।
💣⚖️ गिरफ्तारी और कालापानी की सजा
1909 में मदन लाल ढींगरा द्वारा कर्जन वायली की हत्या के बाद ब्रिटिश सरकार ने क्रांतिकारियों पर शिकंजा कस दिया। मार्च 1910 में सावरकर को गिरफ्तार कर लिया गया।
भारत लाते समय फ्रांस के मार्सेल बंदरगाह पर उन्होंने जहाज से कूदकर भागने की कोशिश की, लेकिन दोबारा पकड़ लिए गए। 27 वर्ष की आयु में उन्हें दो आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और अंडमान की सेल्युलर जेल भेजा गया।
1911 से 1924 तक का उनका कारावास काल अत्यंत कठिन रहा—अंधेरी कोठरियां, शारीरिक यातनाएं और अमानवीय परिस्थितियां। ‘काला पानी’ की सजा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक दर्दनाक अध्याय बन गई।
📚✍️ विचारक और समाज सुधारक
रिहाई के बाद सावरकर ने सामाजिक सुधार और लेखन को अपना माध्यम बनाया। जातिवाद, अंतरजातीय विवाह, धर्म परिवर्तन और राष्ट्रीय एकता जैसे मुद्दों पर उन्होंने खुलकर लिखा।
वे हिंदू राष्ट्रवाद के प्रमुख विचारक के रूप में भी जाने गए। उनके विचारों ने भारतीय राजनीति और वैचारिक बहसों को गहराई से प्रभावित किया।
🕊️ अंतिम दिन और ‘आत्मार्पण’
1960 के बाद उनकी तबीयत गिरने लगी। 1 फरवरी 1966 को उन्होंने अन्न-जल त्यागने का निर्णय लिया, जिसे उन्होंने ‘आत्मार्पण’ कहा। 26 फरवरी 1966 को उनका निधन हो गया।
तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने उन्हें स्वतंत्रता संग्राम का कर्मठ और जुझारू कार्यकर्ता बताया था।
🌟📜 विरासत जो आज भी जीवित है
वीर सावरकर का जीवन त्याग, वैचारिक प्रतिबद्धता और क्रांतिकारी साहस का प्रतीक है। वे आज भी इतिहास, राजनीति और प्रतियोगी परीक्षाओं में चर्चा का प्रमुख विषय बने हुए हैं।
उनकी कहानी केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि यह याद दिलाती है कि स्वतंत्रता की राह संघर्ष, बलिदान और अदम्य इच्छाशक्ति से होकर गुजरती है।






