🚨🌄 BREAKING NEWS: अरावली की नई परिभाषा पर बवाल
100 मीटर नियम से सिमट सकती है संरक्षित पहाड़ियों की सीमा
नई दिल्ली:
अरावली पहाड़ियों को लेकर केंद्र सरकार की 100 मीटर ऊंचाई आधारित नई परिभाषा ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। पर्यावरण मंत्रालय ने इस परिभाषा के आधार पर Survey of India को अरावली की मैपिंग का निर्देश दिया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खनन उद्देश्यों के लिए स्वीकार किया है।
⚠️🌿 पर्यावरणविदों की चेतावनी
खनन के लिए खुल सकते हैं संवेदनशील इलाके
विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली की ज्यादातर पहाड़ियां कम ऊंचाई वाली हैं। ऐसे में 100 मीटर की कसौटी लागू होने से कानूनी रूप से संरक्षित अरावली क्षेत्र काफी घट सकता है, जिससे पहले सुरक्षित माने जाने वाले कई इलाके खनन के दायरे में आ सकते हैं।
🗺️📏 Survey of India की मैपिंग निर्णायक
नक्शे से तय होगा अरावली का भविष्य
मंत्रालय के निर्देश के अनुसार, Survey of India अब नई परिभाषा के तहत अरावली की पहाड़ियों और रेंज को चिन्हित करेगा। इसी मैपिंग के आधार पर आगे खनन, संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े फैसले लिए जाएंगे।
🌍💧 क्यों अहम है अरावली?
ऊंचाई कम, लेकिन पर्यावरणीय भूमिका बड़ी
अरावली पहाड़ियां थार रेगिस्तान को फैलने से रोकने, भूजल रिचार्ज और जैव विविधता के संरक्षण में अहम भूमिका निभाती हैं। पर्यावरणविदों की मांग है कि अरावली को उसकी ऊंचाई नहीं, बल्कि उसके पारिस्थितिक महत्व के आधार पर परिभाषित किया जाए।