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स्पेशल सेल ने सेंट्रल एजेंसियों के सहयोग से हरसिमरन उर्फ बादल उर्फ सिमरन नाम के गैंगस्टर को गिरफ्तार किया। गैंगस्टर की योजना बैंकॉक से दुबई, फिर अजरबैजान होते हुए रूस और बेलारूस के रास्ते यूरोप और अमेरिका तक भागने की थी।
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नई दिल्ली: स्पेशल सेल ने सेंट्रल एजेंसियों की मदद से अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर हरसिमरन उर्फ बादल उर्फ सिमरन को गिरफ्तार किया है। हरसिमरन ने लंबे समय से अपराध की दुनिया में अपने पैर जमाए हुए थे और गोल्डी ढिल्लों के साथ मिलकर अमेरिका और यूरोप में संगठित अपराध करने की योजना बना रहे थे। उनके खिलाफ जबरन वसूली, हत्या, हत्या की कोशिश, और आर्म्स एक्ट सहित पहले से ही 23 अलग-अलग मामले दर्ज हैं। जमानत मिलने के बावजूद वह ट्रायल कोर्ट में पेश नहीं हो रहा था और पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी।
पुलिस जांच में सामने आया कि हरसिमरन ने नकली पासपोर्ट बनवाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भागने की कई बार कोशिश की। वह बैंकॉक से दुबई, फिर अजरबैजान होते हुए रूस और बेलारूस के रास्ते यूरोप और अमेरिका पहुंचने का प्रयास कर रहा था। पहले भी वह इसी तरह भागने की कोशिश में पकड़ा गया और डिपोर्ट किया गया था। हाल ही में जब वह दुबई से बैंकॉक लौटा, तो सेंट्रल एजेंसियों और स्थानीय अधिकारियों की मदद से उसे हिरासत में लिया गया। 26 नवंबर को उसे भारत लाया गया और दिल्ली हवाई अड्डे पर स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया।
जांच के दौरान यह भी पता चला कि हरसिमरन ने गोरखपुर निवासी राजेश सिंह पुत्र विनोद सिंह के नाम से नकली पासपोर्ट बनवाया था। विदेश मंत्रालय ने उसके पासपोर्ट को रद्द कर दिया था और लुकआउट सर्कलर जारी किया गया था। इसके बावजूद हरसिमरन लगातार विदेश यात्रा की योजना बना रहा था।
हरसिमरन का अपराध का सफर काफी लंबा और सुनियोजित रहा है। वह शालीमार बाग में बचपन से ही अलग-अलग अखाड़ों में कुश्ती करता आया था और बाद में कुश्ती के लिए महाराष्ट्र के कोल्हापुर तक गया। वहां सिकंदर नामक व्यक्ति से उसका संपर्क बना, जिसने उसे अपराध की दुनिया में प्रवेश दिलाया। जेल में रहने के दौरान हरसिमरन ने कई गैंगस्टरों के संपर्क बनाए और गोल्डी ढिल्लों के साथ जुड़कर अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क का हिस्सा बन गया। गोल्डी ढिल्लों, जो फिलहाल यूरोप में है, ने उसे दुबई आने और वहां से आगे का रास्ता तय करने के निर्देश दिए।
पुलिस के मुताबिक हरसिमरन लखनऊ से बैंकॉक पहुंचा और वहां कुछ समय ठहरा। इसके बाद दुबई गया और गोल्डी के निर्देशानुसार एक स्थानीय व्यक्ति से संपर्क किया। अजरबैजान होते हुए वह अमेरिका के लिए फ्लाइट लेने की कोशिश करने लगा, लेकिन इमीग्रेशन अधिकारियों ने उसके दस्तावेज संदिग्ध पाए और उसे वापस दुबई भेज दिया। इसके बाद वह बैंकॉक लौटा, जहां सेंट्रल एजेंसियों और स्थानीय अधिकारियों की मदद से उसे हिरासत में लिया गया।
स्पेशल सेल आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगा रही है कि उसके नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं और अंतरराष्ट्रीय अपराध में उसके सहयोगी कौन हैं। जांच में यह भी सामने आया कि जमानत मिलने के बाद उसने कम से कम 14 मामलों की अदालत सुनवाई में पेश होना बंद कर दिया था। पुलिस का दावा है कि हरसिमरन के गिरफ्तारी से अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क पर बड़ा झटका लगेगा और इसके साथ ही उसके संपर्कों और सहयोगियों की खोज भी तेज हो जाएगी।
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