“विनाश के बीच भारत ने दी प्रेरणा: पीएम मोदी ने मन की बात में देश की संस्कृति पर जोर दिया”


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“पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में देश की शांति और करुणा की परंपरा का किया स्मरण”

pm modi

 

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ का 128वां एपिसोड रविवार को प्रसारित हुआ। इस दौरान पीएम मोदी ने महाभारत से लेकर द्वितीय विश्व युद्ध तक के ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख किया और देशवासियों को प्रेरित करने वाले संदेश दिए। उन्होंने हाल ही में अपनी कुरुक्षेत्र यात्रा, सऊदी अरब में सार्वजनिक मंच से गीता की प्रस्तुति, तथा महाराजा दिग्विजय सिंह के महान कार्यों की भी चर्चा की।

पीएम मोदी ने विशेष रूप से हरियाणा के कुरुक्षेत्र का जिक्र करते हुए बताया कि महाभारत का युद्ध यहीं हुआ था। उन्होंने बताया कि डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से थ्रीडी, लाइट एंड साउंड शो और अन्य डिजिटल प्रस्तुतियों के माध्यम से लोग इस ऐतिहासिक युद्ध का अनुभव महाभारत अनुभव केंद्र में कर सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि यह अनुभव न केवल इतिहास को जीवंत करता है, बल्कि देश की संस्कृति और शांति की परंपरा को भी उजागर करता है।

**पीएम मोदी ने कुरुक्षेत्र के महाभारत अनुभव केंद्र और अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में अपनी हालिया यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस अनुभव केंद्र में महाभारत की गाथा को थ्रीडी, लाइट एंड साउंड शो और डिजिटल तकनीक के माध्यम से दर्शाया जा रहा है, जिसे देखकर उन्हें बेहद आनंद आया। 25 नवंबर को जब पीएम मोदी खुद इस केंद्र गए, तो उन्होंने इस तकनीकी प्रस्तुति के अनुभव को प्रेरणादायक बताया।

साथ ही, उन्होंने कुरुक्षेत्र में ब्रह्म सरोवर पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल होने को भी अपने लिए बहुत खास बताया। इस महोत्सव में विश्व के कई देशों, जैसे यूरोप और सेंट्रल एशिया के लोग भी उपस्थित थे। पीएम मोदी ने कहा कि यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि लोग दिव्य ग्रंथ गीता से प्रेरणा ले रहे हैं और इसके संदेशों को जीवन में उतारने की कोशिश कर रहे हैं। यह महोत्सव न केवल भारतीय संस्कृति को विश्व स्तर पर प्रस्तुत करता है, बल्कि गीता के आध्यात्मिक संदेश को भी व्यापक रूप से फैलाता है।**

**प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में बताया कि इस महीने की शुरुआत में सऊदी अरब में पहली बार किसी सार्वजनिक मंच पर गीता की प्रस्तुति की गई। इसके अलावा यूरोप के लातविया में भी एक यादगार गीता महोत्सव आयोजित किया गया, जिसमें लातविया, एस्टोनिया, लिथुआनिया और अल्जीरिया के कलाकारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पीएम मोदी ने इसे दर्शकों के लिए प्रेरणादायक क्षण बताया और कहा कि लोग दिव्य ग्रंथ गीता से प्रेरणा ले रहे हैं।

पीएम मोदी ने भारत की महान संस्कृति में शांति और करुणा के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास में कठिन परिस्थितियों में भी भारत ने मानवता और करुणा का मार्ग नहीं छोड़ा। उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के समय का उदाहरण देते हुए गुजरात के नवानगर के जाम साहब और महाराजा दिग्विजय सिंह के कार्यों का उल्लेख किया। उस समय जाम साहब किसी सामरिक गठबंधन या युद्ध की रणनीति के बारे में नहीं सोच रहे थे, बल्कि उनकी चिंता यह थी कि कैसे युद्ध के बीच पोलिश यहूदी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे महान कार्य आज भी हमें प्रेरणा देते हैं और हमें कठिन परिस्थितियों में भी मानवता और करुणा का मार्ग अपनाने की सीख देते हैं।**

 

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