‘तुम्हें देखकर छूने का मन नहीं करता’, नई मां ने बयां क‍िया दर्द, बोली-ड‍िलीवरी के बाद पति ने द‍िए ऐसे जख्‍म, जो द‍िखते नहीं


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प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं का वजन बढ़ना बिल्कुल सामान्य है, लेकिन अफसोस की बात है कि इसी वजह से अक्सर उन्हें आलोचना झेलनी पड़ती है। कई बार यह ताने किसी बाहर वाले से नहीं, बल्कि अपने ही पति से सुनने को मिलते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ सोनिया गुप्ता के साथ। जानते हैं पूरी कहानी उनकी।

new mom shares deep pain after delivery husband body shamed her said i don t even feel like touching you (2)
Image- सांकेत‍िक तस्‍वीर
मुझे तो ये बात बिल्कुल बकवास लगती है कि प्यार शरीर से नहीं, मन से किया जाता है… जब आप क‍िसी से प्‍यार करते हैं तो सूरत नहीं, सीरत देखते हैं …क्‍योंक‍ि अगर ऐसा सच में होता, तो उस वक्‍त मेरे साथ वो सब न होता, तो हुआ। मुझे याद है आज भी बेटी के जन्म के बाद, जब मेरा वजन थोड़ा बढ़ा, तो वो इंसान जिसने कभी कहा था ‘तुम मेरी लाइफ की सबसे खूबसूरत लड़की हो’, वही मुझसे कहने लगा-तुम्हें देखकर छूने का मन तक नहीं करता।

देखो जरा गाल कैसे फूले हैं’ और न जाने क्‍या-क्‍या पत‍ि ने उस समय ऐसे-ऐसे ताने मारे, जो किसी बड़े जख्म से कम नहीं थे। ये जख्म भले ही दिखते नहीं, लेकिन भीतर इतना गहरा दर्द दि‍या हैं कि दिल-दिमाग तक हिल जाता था। उस वक्‍त तो कभी-कभी मैं खुद से पूछती थी क‍ि क्या इसी इंसान के लिए मैंने सबके खिलाफ जाकर इससे शादी की थी?

बेटी के इर्द-ग‍िर्द समाईं दुन‍िया

बेटी के इर्द-ग‍िर्द समाईं दुन‍िया

ये उस समय की बात है, जब मेरी बेटी को जन्म हुए सिर्फ एक महीना ही हुआ था। मैं पूरी तरह बेटी की परवरिश में डूब चुकी थी। कब दिन ढल जाता, कब रात बीत जाती…सच कहूं तो मुझे खुद का भी एहसास नहीं होता था। न खाने-पीने की फिक्र,
न इस बात का होश कि मेरे बाल कैसे हैं या चेहरा कैसा दिखता है, उस वक्‍त मेरी सारी दुनिया बस मेरी नन्ही सी जान के इर्द-गिर्द सिमट चुकी थी।

ड‍िलीवरी के बाद नहीं दे पाती थी खुद पर ध्‍यान

ड‍िलीवरी के बाद नहीं दे पाती थी खुद पर ध्‍यान

बच्ची की परवरिश में मैं इतनी उलझी हुई थी कि खुद का ध्यान रखना नामुमकिन लग रहा था। पहले ही प्रेग्नेंसी में मेरा वजन काफी बढ़ गया था, और उसके बाद ब्रेस्टफीडिंग के कारण उनका साइज और भी बढ़ा लगता था। हालांकि ऐसा नहीं था क‍ि मुझे अपने बढ़े वजन का एहसास नहीं था, लेकिन घर में कोई सपोर्ट सिस्टम नहीं होने की वजह से मैं खुद के लिए समय निकाल ही नहीं पाती थी।

पत‍ि ने सुनाए ऐसे-ऐसे तानें

पत‍ि ने सुनाए ऐसे-ऐसे तानें

उसी समय शेखर (पति) ने मेरे वजन को लेकर कमेंट करना शुरू कर दिया- ‘अपना वजन देखो जरा, गाल कैसे फूल गए हैं, कमर का अता-पता नहीं है, कुछ क्यों नहीं करती, अपना ध्यान क्यों नहीं रखती?”पहले तो मैंने इसे पॉजिटिवली लेने की कोशिश की, सोचा शायद वह मुझे सही सलाह दे रहे हैं और मुझे इस दिशा में सोचनी चाहिए। लेकिन धीरे-धीरे यह हर दूसरी बात में शामिल होने लगा, बस यही कि मैं कितनी मोटी हो गई हूं, उनके कॉलिग्स की बीव‍ियों ने तो क‍ितनी जल्‍दी वजन कम कर ल‍िया।यह सुनकर मैंने शेखर को समझाने की कोश‍िश क‍ि इस बात को तो समझो क‍ि ड‍िलीवरी के बाद वजन धीरे-धीरे कम होता है, अचानक से नहीं, लेक‍िन वो कुछ समझने को तैयार नहीं।

फ‍िर एक द‍िन हर हद हो गई पार

फ‍िर एक द‍िन हर हद हो गई पार

मैं शेखर की बातें सुनती तो जरूर थी, लेकिन हर बार उन्हें नजरअंदाज करने की कोशिश करती। हालांक‍ि, कभी जब ज्‍यादा परेशान होती, तो चुपके से किसी कोने में जाकर रो लेती… लेकिन फ‍िर बेटी की मुस्‍कान को देखकर सब भूल जाती थी। लेकिन एक दिन शेखर ने हद ही पार कर दी वे बोले- ‘सोनिया, सच कहूं… अब तुम्हें छूने का भी मन नहीं करता। कभी खुद को आईने में देखा है? ब्रेस्ट साइज कैसे बढ़ता जा रहा है… बिल्कुल भद्दा!’ उनकी ये बातें मेरे द‍िल को इतना चुभी, जैसे किसी ने दिल के आर-पार नुकीला तीर मार दिया हो। उस दिन मुझे अहसास हुआ क‍ि शायद मैंने शादी करके गलती कर दी।

ऐसे संभाला खुद को

ऐसे संभाला खुद को

दोस्त की सलाह पर मैंने अपने लिए थोड़ा-सा समय निकालना शुरू किया। रोज हल्की वॉक और कुछ रिलैक्सेशन योगासन करने लगी। यह सब मैं इसलिए नहीं कर रही थी कि शेखर की नजरों में ‘दुबली-पतली’ दिखूं, बल्कि इसलिए क्योंकि मुझे अपने मन और शरीर को शांत रखना था। मैं चाहती थी कि मैं खुद को संभालूं ,ताकि बेटी की देखभाल भी अच्छे से कर पाऊं और खुद भी मानसिक रूप से मजबूत रहूं।

अपनी ज‍िंदगी पर अपनी शर्तो पर ज‍िऊंगी

अपनी ज‍िंदगी पर अपनी शर्तो पर ज‍िऊंगी

रही बात वजन कम करने की, तो मुझे भी पता है कि ज्‍यादा वजन किसी भी तरह से सेहत के लिए अच्छा नहीं होता। यह कई परेशानियां लेकर आता है। इसलिए मैंने ठान लिया है कि जैसे-जैसे बेटी बड़ी होगी, वैसे-वैसे मैं अपने लिए समय निकालकर अपनी हेल्थ पर और ध्यान दूंगी। जहां तक शेखर की बातों का सवाल है…अब मैंने तय कर लिया है कि उन बातों को अपने दिल पर नहीं लूंगी। अपनी ज‍िंदगी अपने शर्तें पर ज‍िऊंगी।

ड‍िस्‍केलमर: यह कहानी सोन‍िया गुप्‍ता की है, जो एक हाउस वाइफ (नाम बदला हुआ है) हैं। अगर आप भी उनकी तरह अपनी कहानी हमारे साथ साझा करना चाहते हैं, तो [email protected] पर ईमेल करें। आपकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

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