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भारतीय महिला टीम ने आखिरकार वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम कर लिया। हालांकि, उनका वर्ल्ड कप जीतने तक का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। आइये एक बार उनके पूरे सफर पर नजर डालते हैं।
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महिला वर्ल्ड कप 2025 में टीम इंडिया का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा — एक ऐसा सफर जिसमें उतार-चढ़ाव, निराशा, वापसी और अंत में गौरवशाली जीत की कहानी छिपी है। ‘विमेन इन ब्लू’ ने टूर्नामेंट की शुरुआत आत्मविश्वास के साथ की, लेकिन बीच में लगातार मिली तीन हारों ने टीम को लगभग टॉप 4 से बाहर कर दिया था। इसके बावजूद कप्तान हरमनप्रीत कौर और पूरी टीम ने धैर्य और जज़्बे से हार को जीत में बदलने का वो सफर तय किया, जिसने देशभर के करोड़ों फैंस को गर्व से भर दिया।
भारत ने अभियान की शुरुआत श्रीलंका के खिलाफ की, जहां दीप्ति शर्मा और अमनजोत कौर की दमदार पारियों ने टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया और गेंदबाज़ी में दीप्ति ने कमाल दिखाकर भारत को शानदार जीत दिलाई। इसके बाद पाकिस्तान पर 88 रन की धमाकेदार जीत दर्ज कर टीम ने टूर्नामेंट में लय पकड़ ली। लेकिन आगे का रास्ता मुश्किल साबित हुआ — साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के खिलाफ मिली लगातार तीन हारों ने टीम को बैकफुट पर ला दिया। इंग्लैंड के खिलाफ महज 4 रन से हार ने टीम को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया, लेकिन यही पल भारत की वापसी का टर्निंग पॉइंट बना।
‘करो या मरो’ के मुकाबले में न्यूजीलैंड के खिलाफ स्मृति मंधाना और प्रतिका रावल ने शानदार शतक जमाकर भारत को 340 रन तक पहुंचाया। बारिश से बाधित मैच में भारत ने डकवर्थ-लुईस मेथड से जीत हासिल कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। इसके बाद सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीम के खिलाफ जेमिमा रोड्रिग्स और हरमनप्रीत कौर ने कमाल की साझेदारी की। जेमिमा ने अंत तक टिककर न सिर्फ भारत को मैच जिताया, बल्कि यह वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे बड़ा रन चेज भी बन गया।
फाइनल में भारत का सामना साउथ अफ्रीका से हुआ — वही टीम जिसने लीग चरण में भारत को हराया था। इस बार शेफाली वर्मा ने 78 गेंदों में 87 रन की विस्फोटक पारी खेलकर मैच का रुख पलट दिया। दीप्ति शर्मा ने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ अर्धशतक जड़ा बल्कि पांच विकेट भी झटके। साउथ अफ्रीका की टीम 246 रन पर ढेर हो गई और भारत ने 52 रन से ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में जब कप्तान हरमनप्रीत कौर ने वर्ल्ड कप ट्रॉफी उठाई, तो पूरा देश गर्व और भावनाओं से भर गया। यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं थी, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में नया अध्याय लिखने वाली प्रेरक कहानी थी — एक ऐसी कहानी, जिसमें हार की हैट्रिक के बाद भी उम्मीद जिंदा रही और वही उम्मीद भारत को वर्ल्ड चैंपियन बना गई।






