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बिहार के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवार के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव इस बार महुआ विधानसभा सीट से अकेले चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। उनके लिए यह चुनाव राजनीतिक भविष्य की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। महुआ में शुरू की गई विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मतदाताओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना तेज प्रताप के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
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पटना: बिहार के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवार के बड़े बेटे और कभी ‘युवराज’ कहे जाने वाले तेज प्रताप यादव इस बार महुआ विधानसभा सीट से अकेले चुनावी मैदान में हैं। अपने निर्वाचन क्षेत्र में शुरू की गई विकास और बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं को उपलब्धि के रूप में पेश करना उनके लिए इस चुनाव में निर्णायक साबित हो सकता है।
महुआ के पास 462 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल तेज प्रताप की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है। हालांकि, चार साल बीत जाने के बाद भी यह परिसर अधूरा है और अभी तक शुरू नहीं हो सका है। 2015 में महुआ से विधायक बनने और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री के रूप में काम करने के दौरान तेज प्रताप ने इस परियोजना को अपनी प्राथमिकता बताया था, जिससे स्थानीय लोगों में उनके प्रति सकारात्मक धारणा बनी।
अब वे अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के उम्मीदवार के रूप में ब्लैकबोर्ड चुनाव चिह्न लेकर मैदान में हैं। उनके छोटे भाई और राजद नेता तेजस्वी यादव महागठबंधन के प्रमुख चेहरे हैं, जिससे यह देखना दिलचस्प होगा कि वे अपने बड़े भाई के खिलाफ प्रचार करते हैं या नहीं।
महुआ सीट पर मुकाबला कड़ा है — राजद के मौजूदा विधायक डॉ. मुकेश कुमार रौशन और एनडीए समर्थित लोजपा (रालोद) के उम्मीदवार संजय कुमार सिंह तेज प्रताप के लिए चुनौती पेश कर रहे हैं। इस चुनाव में तेज प्रताप के सामने अपनी राजनीतिक साख बचाने की सबसे बड़ी परीक्षा है।






