देश अफगान विदेश मंत्री मुत्तकी आखिर क्यों नहीं कर पाए ताजमहल का दीदार, अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष वजह बनी या कुछ और?


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अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर रातोंरात हुई झड़पों में रविवार को कम से कम 18 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कई अन्य को पकड़ लिया गया। यह झड़पें इस हफ्ते की शुरुआत में काबुल पर पाकिस्तानी हवाई हमले के बाद अफगान बलों द्वारा जवाबी हमले शुरू करने के बाद हुई हैं। ऐसे में तनाव बढ़ता जा रहा है, जिस कारण भी मुत्तकी दिल्ली में ही रुके हैं। बताया गया कि वह काबुल के साथ बदलते हालात पर बेहतर समन्वय के लिए दिल्ली में ही रहेंगे।

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Afghan Muttaqi Agra Taj Mahal Visit Called off: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी का रविवार को होने वाला आगरा दौरा रद्द हो गया है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री रविवार को ताजमहल का दीदार करने के लिए आने वाले थे लेकिन किन्हीं कारणों से उनकी ये यात्रा रद्द हो गई है।

क्या था कार्यक्रम

उन्होंने बताया कि तय कार्यक्रम के मुताबिक मुत्तकी को रविवार को अपराह्न 11 बजे ताजमहल पहुंचना था और एक घंटे ताजमहल का दीदार करने के बाद उन्हें आगरा में ही दोपहर का भोजन करने के बाद वापस दिल्ली रवाना होना था।मुत्तकी का आगरा में ताजमहल का दौरा क्यों रद्द हुआ, इसकी वजह पता नहीं चला पायी है। जिला प्रशासन के प्रोटोकॉल विभाग ने मुत्तकी के आगरा कार्यक्रम के रद्द होने की पुष्टि की है।

पाकिस्तान से बढ़ता तनाव

बता दें कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर रातोंरात हुई झड़पों में रविवार को कम से कम 18 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कई अन्य को पकड़ लिया गया। यह झड़पें इस हफ्ते की शुरुआत में काबुल पर पाकिस्तानी हवाई हमले के बाद अफगान बलों द्वारा जवाबी हमले शुरू करने के बाद हुई हैं। ऐसे में तनाव बढ़ता जा रहा है, जिस कारण भी मुत्तकी दिल्ली में ही रुके हैं। बताया गया कि वह काबुल के साथ बदलते हालात पर बेहतर समन्वय के लिए दिल्ली में ही रहेंगे।

इससे पहले अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मुत्तकी शनिवार को सहारनपुर के देवबंद स्थित मदरसा दारुल उलूम पहुंचे थे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया था।

 

भारत यात्रा पर मुत्तकी

मुत्तकी बृहस्पतिवार को छह दिवसीय यात्रा पर नयी दिल्ली पहुंचे। अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी के सत्ता से हटने और तालिबान के सत्ता अपने हाथ में लेने के चार साल बाद तालिबान सरकार के किसी नेता की भारत की यह पहली उच्च-स्तरीय यात्रा है। भारत ने अब तक तालिबान को मान्यता नहीं दी है।

मुत्तकी अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली से सड़क मार्ग से देवबंद पहुंचे, जो दक्षिण एशिया के सबसे प्रभावशाली इस्लामी मदरसों में से एक है। दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम (कुलपति) अबुल कासिम नोमानी, जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और दारुल उलूम के पदाधिकारियों ने दारुल उलूम देवबंद में अफगान विदेश मंत्री का स्वागत किया।

मुत्तकी के आगमन से पहले खुफिया एजेंसियों, सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने देवबंद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। वहीं, अफगान विदेश मंत्री की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और अफगानिस्तान दोनों के पाकिस्तान के साथ सीमा पार आतंकवाद सहित कई मुद्दों को लेकर तनावपूर्ण संबंध हैं।

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