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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की घोषणा के बाद महागठबंधन सीट शेयरिंग में पेंच फंसता नजर आ रहा है। बाहर से जहां सभी नेता एकजुटता का प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं अंदर सीट बंटवारे खींचतान मची है। महागठबंधन के सभी दल तेजस्वी सीएम प्रोजेक्ट करने को तैयार हैं पर कांग्रेस सीएम फेस के साथ उतरने को राजी नहीं है। वहीं, सीटों के बंटवारे पर भी अभी सभी की सहमति नहीं बन पा रही है।
वीआईपी प्रमुख सहनी जहां 30 सीट और डिप्टी सीएम पर अड़े हुए हैं, वहीं माले भी 40 सीट की डिमांड कर रही है। सीट शेयरिंग के गुणा गणित के बीच कांग्रेस ने तीन डिप्टी का फॉर्मूला प्रपोज किया है। इनमें एक दलित, एक अति दलित और एक मुस्लिम चेहरा होगा। इस प्रपोजल के बाद से ही सीटों का बंटवारा फंस गया है और लगातार तीन दिन की मीटिंग के बाद भी कोई रिजल्ट नहीं निकल पाया है।
पिछले तीन दिनों में ही हुई बैठक में किस पार्टी ने क्या दावा किया, क्यों पेंच फंसा है? कांग्रेस क्या चाहती है? माले की डिमांड क्या है और तेजस्वी क्यों फैसला नहीं ले पा रहे? पढ़िए इनसाइड स्टोरी

तेजस्वी के घर में 6 बैठक, तीन दिन लगातार हुआ मंथन
बीते एक सप्ताह में तेजस्वी यादव के आवास पर छह बैठक हो चुकी हैं, 5 अक्टूबर से लेकर 7 अक्टूबर तक लगातार तीन दिन बैठक चली। 7 अक्टूबर को तो रात एक बजे तक सीट शेयरिंग, डिप्टी सीएम, सीएम फेस को लेकर मंथन होता रहा। लेकिन कोई फैसला नहीं हो पाया। मीटिंग से निकलने बाद सहनी ने कहा–हम लगभग फाइनल प्वाइंट पर पहुंच गए हैं और मैं डिप्टी सीएम बनूंगा। 8 अक्टूबर को घोषणा कर देंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अभी बैठक का दौर जारी रहेगा।

तेजस्वी के घर में 6 बैठक, तीन दिन लगातार हुआ मंथन
बीते एक सप्ताह में तेजस्वी यादव के आवास पर छह बैठक हो चुकी हैं, 5 अक्टूबर से लेकर 7 अक्टूबर तक लगातार तीन दिन बैठक चली। 7 अक्टूबर को तो रात एक बजे तक सीट शेयरिंग, डिप्टी सीएम, सीएम फेस को लेकर मंथन होता रहा। लेकिन कोई फैसला नहीं हो पाया। मीटिंग से निकलने बाद सहनी ने कहा–हम लगभग फाइनल प्वाइंट पर पहुंच गए हैं और मैं डिप्टी सीएम बनूंगा। 8 अक्टूबर को घोषणा कर देंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अभी बैठक का दौर जारी रहेगा।
5 अक्टूबर: राजद की छह सीटों पर फंस गया पेंच
रविवार 5 अक्टूबर को तेजस्वी आवास पर हुई मैराथन बैठक देर रात तक चली। इस बैठक में तेजस्वी यादव के साथ आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल, अब्दुलबारी सिद्दीकी, कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, माले से कुणाल, सीपीआई के रामनरेश पांडेय, सीपीएम से ललन चौधरी, वीआईपी से मुकेश सहनी शामिल हुए।
बैठक में सीटों के फार्मूले पर डिटेल्ड चर्चा हुई। सबसे प्रभावी फार्मूला यह रहा कि 2020 के विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन को सबसे अधिक महत्व दिया जाए। जिन सीटों पर उम्मीदवार 1000 वोट से कम से हारे थे और दूसरे स्थान पर रहे थे, उसे भी बड़ा आधार बनाया जाए। 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को तो सामने रखा ही जाए। लेकिन कांग्रेस और आरजेडी के बीच आधा दर्जन सीटों पर पेंच फंस गया। कांग्रेस की सबसे बड़ी मांग लेफ्ट की बछवाड़ा सीट को लेकर थी, जो सीपीआई की पारंपरिक सीट मानी जाती है।
बैठक के बाद वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी ने दावा किया कि “सीट बंटवारे की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। हम ही सरकार बनाएंगे और हम ही डिप्टी सीएम होंगे।” लेकिन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने सहनी के बयान पर कहा कि “यह सब अंदर की बातें होती हैं, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी”।
6 अक्टूबर: माले का पहला विरोध, मांगी 40 सीटें
सोमवार 6 अक्टूबर को तेजस्वी ने वाम दलों के साथ अलग से बैठक की। इस बैठक में भाकपा-माले की नाराजगी खुलकर सामने आई। माले ने 40 सीटों की मांग दुहराई, जबकि सीपीआई ने 24 और सीपीआईएम ने 11 सीटों की मांग की। आरजेडी की तरफ से माले को 20 के आसपास सीटें देने की बात कही गई, साथ ही उसकी तीन-चार सिटिंग सीटें भी लेने की बात कही गई। इस पर माले तैयार नहीं हुई। माले के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि वे कम से कम 25 सीटें चाहते हैं।
लेफ्ट की बाकी पार्टियों को पहले की तरह सीपीआई को 6 और सीपीआईएम को 4 सीटें देने की बात हुई, लेकिन इनकी भी कुछ सीटें बदलने पर चर्चा हुई। आरजेडी ने स्पष्ट कर दिया कि वह 130-135 से कम पर लड़ना नहीं चाहती।
5 अक्टूबर: राजद की छह सीटों पर फंस गया पेंच
रविवार 5 अक्टूबर को तेजस्वी आवास पर हुई मैराथन बैठक देर रात तक चली। इस बैठक में तेजस्वी यादव के साथ आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल, अब्दुलबारी सिद्दीकी, कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, माले से कुणाल, सीपीआई के रामनरेश पांडेय, सीपीएम से ललन चौधरी, वीआईपी से मुकेश सहनी शामिल हुए।
बैठक में सीटों के फार्मूले पर डिटेल्ड चर्चा हुई। सबसे प्रभावी फार्मूला यह रहा कि 2020 के विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन को सबसे अधिक महत्व दिया जाए। जिन सीटों पर उम्मीदवार 1000 वोट से कम से हारे थे और दूसरे स्थान पर रहे थे, उसे भी बड़ा आधार बनाया जाए। 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को तो सामने रखा ही जाए। लेकिन कांग्रेस और आरजेडी के बीच आधा दर्जन सीटों पर पेंच फंस गया। कांग्रेस की सबसे बड़ी मांग लेफ्ट की बछवाड़ा सीट को लेकर थी, जो सीपीआई की पारंपरिक सीट मानी जाती है।
बैठक के बाद वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी ने दावा किया कि “सीट बंटवारे की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। हम ही सरकार बनाएंगे और हम ही डिप्टी सीएम होंगे।” लेकिन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने सहनी के बयान पर कहा कि “यह सब अंदर की बातें होती हैं, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी”।

तेजस्वी के घर में 6 बैठक, तीन दिन लगातार हुआ मंथन
बीते एक सप्ताह में तेजस्वी यादव के आवास पर छह बैठक हो चुकी हैं, 5 अक्टूबर से लेकर 7 अक्टूबर तक लगातार तीन दिन बैठक चली। 7 अक्टूबर को तो रात एक बजे तक सीट शेयरिंग, डिप्टी सीएम, सीएम फेस को लेकर मंथन होता रहा। लेकिन कोई फैसला नहीं हो पाया। मीटिंग से निकलने बाद सहनी ने कहा–हम लगभग फाइनल प्वाइंट पर पहुंच गए हैं और मैं डिप्टी सीएम बनूंगा। 8 अक्टूबर को घोषणा कर देंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अभी बैठक का दौर जारी रहेगा।
5 अक्टूबर: राजद की छह सीटों पर फंस गया पेंच
रविवार 5 अक्टूबर को तेजस्वी आवास पर हुई मैराथन बैठक देर रात तक चली। इस बैठक में तेजस्वी यादव के साथ आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल, अब्दुलबारी सिद्दीकी, कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, माले से कुणाल, सीपीआई के रामनरेश पांडेय, सीपीएम से ललन चौधरी, वीआईपी से मुकेश सहनी शामिल हुए।
बैठक में सीटों के फार्मूले पर डिटेल्ड चर्चा हुई। सबसे प्रभावी फार्मूला यह रहा कि 2020 के विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन को सबसे अधिक महत्व दिया जाए। जिन सीटों पर उम्मीदवार 1000 वोट से कम से हारे थे और दूसरे स्थान पर रहे थे, उसे भी बड़ा आधार बनाया जाए। 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को तो सामने रखा ही जाए। लेकिन कांग्रेस और आरजेडी के बीच आधा दर्जन सीटों पर पेंच फंस गया। कांग्रेस की सबसे बड़ी मांग लेफ्ट की बछवाड़ा सीट को लेकर थी, जो सीपीआई की पारंपरिक सीट मानी जाती है।
बैठक के बाद वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी ने दावा किया कि “सीट बंटवारे की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। हम ही सरकार बनाएंगे और हम ही डिप्टी सीएम होंगे।” लेकिन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने सहनी के बयान पर कहा कि “यह सब अंदर की बातें होती हैं, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी”।
6 अक्टूबर: माले का पहला विरोध, मांगी 40 सीटें
सोमवार 6 अक्टूबर को तेजस्वी ने वाम दलों के साथ अलग से बैठक की। इस बैठक में भाकपा-माले की नाराजगी खुलकर सामने आई। माले ने 40 सीटों की मांग दुहराई, जबकि सीपीआई ने 24 और सीपीआईएम ने 11 सीटों की मांग की। आरजेडी की तरफ से माले को 20 के आसपास सीटें देने की बात कही गई, साथ ही उसकी तीन-चार सिटिंग सीटें भी लेने की बात कही गई। इस पर माले तैयार नहीं हुई। माले के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि वे कम से कम 25 सीटें चाहते हैं।
लेफ्ट की बाकी पार्टियों को पहले की तरह सीपीआई को 6 और सीपीआईएम को 4 सीटें देने की बात हुई, लेकिन इनकी भी कुछ सीटें बदलने पर चर्चा हुई। आरजेडी ने स्पष्ट कर दिया कि वह 130-135 से कम पर लड़ना नहीं चाहती।
6 अक्टूबर: माले का पहला विरोध, मांगी 40 सीटें
सोमवार 6 अक्टूबर को तेजस्वी ने वाम दलों के साथ अलग से बैठक की। इस बैठक में भाकपा-माले की नाराजगी खुलकर सामने आई। माले ने 40 सीटों की मांग दुहराई, जबकि सीपीआई ने 24 और सीपीआईएम ने 11 सीटों की मांग की। आरजेडी की तरफ से माले को 20 के आसपास सीटें देने की बात कही गई, साथ ही उसकी तीन-चार सिटिंग सीटें भी लेने की बात कही गई। इस पर माले तैयार नहीं हुई। माले के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि वे कम से कम 25 सीटें चाहते हैं।
लेफ्ट की बाकी पार्टियों को पहले की तरह सीपीआई को 6 और सीपीआईएम को 4 सीटें देने की बात हुई, लेकिन इनकी भी कुछ सीटें बदलने पर चर्चा हुई। आरजेडी ने स्पष्ट कर दिया कि वह 130-135 से कम पर लड़ना नहीं चाहती।






