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Chhattisgarh Topper Porabai Cheating Case: 2008 में छत्तीसगढ़ की स्टेट टॉपर बनी पोराबाई को अदालत ने नकल करने का दोषी पाया है। आखिर इस ‘टॉपर’ की सच्चाई कैसे दुनिया के सामने खुली? जानते हैं विस्तार से।
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🎓⚖️ 12वीं की स्टेट टॉपर पोराबाई को 5 साल की जेल: 17 साल बाद खुला नकल का फर्जीवाड़ा 📚⛓️
📅 मामले की शुरुआत
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साल 2008 में छत्तीसगढ़ बोर्ड का 12वीं का रिजल्ट आया।
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पोराबाई नाम की छात्रा, बिर्रा के सरस्वती शिशु मंदिर हायर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा, स्टेट टॉपर घोषित हुई।
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500 में से 484 अंक पाने वाली यह लड़की गांव की थी और उसकी सफलता पर प्रशासन खुश था, लेकिन सवाल उठते देर नहीं लगी।
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आरोप लगे कि पेपर किसी और ने दिए थे।
⚖️ 17 साल बाद आया फैसला
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सेकेंड एडिशनल सेशन जज गणेश सम पटेल ने पोराबाई समेत 4 लोगों को दोषी माना।
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सभी को 5-5 साल की जेल की सजा सुनाई गई।
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दोषियों में पोराबाई के अलावा स्कूल का प्रिंसिपल, सेंटर का अध्यक्ष और टीचर शामिल थे।
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यह फैसला खास इसलिए भी है क्योंकि निचली अदालत में सबूतों के अभाव में ये सभी बरी हो गए थे, लेकिन छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अपील की और आखिरकार न्याय हुआ।
🔍 मामले का पर्दाफाश कैसे हुआ
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पोराबाई की कॉपी बेहद साफ और उच्च स्तर की अंग्रेज़ी में लिखी हुई थी।
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बोर्ड चेयरमैन बीकेएस रे ने देखा कि यह संभव नहीं था कि गांव की लड़की ने ऐसे पेपर लिखे हों।
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पुराने रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि पोराबाई पहले सेकंड या थर्ड डिविजन से ऊपर नहीं गई थी और कई बार फेल भी हुई थी।
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अलग-अलग पेपर में अलग हैंडराइटिंग मिली।
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जांच में यह भी खुलासा हुआ कि पोराबाई परीक्षा देने सेंटर में ही नहीं पहुंची थी, मतलब किसी और ने उसके पेपर दिए थे।
📝 सजा और कानून की अहमियत
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छत्तीसगढ़ और देश के अन्य राज्यों में कई बार नकल और फर्जीवाड़ा करके अपात्र छात्र शीर्ष स्थान हासिल कर लेते हैं, जबकि योग्य छात्र पीछे रह जाते हैं।
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यह फैसला शिक्षा प्रणाली और कानून की निष्पक्षता पर भरोसा बनाए रखने में मदद करेगा।
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नकल करने पर सजा:
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स्कूल परीक्षा में 3 साल तक की जेल
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CBSE में जीवनभर का बैन
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10 लाख रुपये तक का जुर्माना
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सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधन रोकथाम अधिनियम 2024 के तहत 10 साल जेल और 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना
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