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मुश्किल दौर से गुजर रही एड-टेक कंपनी बायजू को अमेरिका में बड़ी राहत मिली है। बायजू की एक सहयोगी कंपनी ने अमेरिका में 1.2 अरब डॉलर का लोन लिया था। इसमें से 533 मिलियन डॉलर डायवर्ट करने का आरोप है।

1.2 अरब डॉलर का लोन देने वाले कर्जदाताओं के एक समूह ने 11 अगस्त को रवींद्रन के खिलाफ डिफॉल्ट का मामला दायर किया था। यह लोन बायजू की एक सहायक कंपनी बायजूज अल्फा को दिया गया था। दिवालियापन अदालत में दायर एक याचिका के अनुसार बायजूज अल्फा पर 1.2 अरब डॉलर के लोन में से 533 मिलियन डॉलर को लंदन स्थित कंपनी OCI लिमिटेड के जरिए राउंड-ट्रिपिंग करने का आरोप लगाया गया था।
आगे की योजना
बायजू की पैरेंट कंपनी थिंक एंड लर्न के संस्थापकों के अनुसार, रवींद्रन द्वारा नई दलीलें पेश करने के बाद अदालत इस बात पर सहमत हुई कि नुकसान की राशि अभी तय नहीं हुई है। अदालत अगले महीने रवींद्रन के खिलाफ लगे आरोपों से होने वाले नुकसान की राशि तय करेगी।
रवींद्रन के लिटिगेशन सलाहकार, माइकल मैकनट ने कहा कि जनवरी 2026 में शुरू होने वाली हर्जाना कार्यवाही के दौरान, हम अदालत में यह साबित करेंगे कि रवींद्रन के कार्यों से वादी को कोई नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि वादी ने जानबूझकर इस और अन्य अदालती मामलों में अदालत को गुमराह किया है। हम डेलावेयर की अदालतों में और इस साल के अंत से पहले दायर किए जाने वाले 2.5 अरब डॉलर के मुकदमे के जरिए जरूरी राहत मांगेंगे।
कंपनी का दावा
रवींद्रन का दावा है कि 533 मिलियन डॉलर को डायवर्ट नहीं किया गया था, बल्कि थिंक एंड लर्न के विस्तार के लिए इस्तेमाल किया गया था। साथ ही उनका कहना है कि बायजू के अमेरिकी कर्जदाताओं का प्रतिनिधित्व करने वाली ग्लास ट्रस्ट और थिंक एंड लर्न के रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) ने पैसों के डायवर्जन का आरोप लगाकर अदालतों को गुमराह किया है।






