भारत को साउथ अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज़ में 3-0 की करारी हार का सामना करना पड़ा है। घरेलू टेस्ट में लगभग अजेय मानी जाने वाली भारतीय टीम की यह प्रदर्शन गिरावट गंभीर चिंता का विषय बन गया है। घर में किसी भी टीम का भारत को हराना बेहद मुश्किल माना जाता था, लेकिन इस क्लीन स्वीप ने टीम की फॉर्म और रणनीति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारत टेस्ट क्रिकेट में अपने घरेलू मैदान पर दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में गिना जाता है। 1933 में पहला घरेलू टेस्ट खेलने के बाद 92 वर्षों में भारत को केवल दो बार ही किसी विदेशी टीम ने क्लीन स्वीप किया है। वेस्टइंडीज जैसी दिग्गज टीम भी भारत को घर में कभी क्लीन स्वीप नहीं कर पाई और श्रीलंका आज तक यहां एक भी टेस्ट नहीं जीत सका। भारत का घरेलू रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया से भी बेहतर है—298 घरेलू टेस्ट में टीम को केवल 60 हार मिली, जो सिर्फ 20.13% है।
हालांकि हालिया प्रदर्शन चिंता बढ़ाने वाला है। पिछले 13 महीनों में भारत घर में 5 टेस्ट हार चुका है, जबकि इसी अवधि में टीम केवल दो टेस्ट ही जीत पाई है। पिछले साल अक्टूबर से अब तक भारत से ज्यादा घरेलू हार सिर्फ जिंबाब्वे को मिली हैं। इसके उलट ऑस्ट्रेलिया ने इस दौरान केवल एक घरेलू मैच गंवाया है।
यह गिरावट इसलिए भी गंभीर है क्योंकि 2013 से 2023 के दशक में भारत ने घरेलू टेस्ट में केवल 3 ही मुकाबले हारे थे। उस अवधि में भारत ने 46 टेस्ट में 36 जीत दर्ज कीं और जीत-हार का अनुपात 12 रहा, जो दुनिया में सबसे बेहतर था। तुलना में ऑस्ट्रेलिया का घरेलू जीत-हार अनुपात 6.5 रहा और उसे 54 मैचों में 6 हार मिलीं, जिनमें से चार भारत के खिलाफ थीं।
कुल मिलाकर, घरेलू टेस्ट में भारत का ऐतिहासिक दबदबा तो अब भी शानदार है, लेकिन पिछले एक साल के लगातार खराब नतीजों ने टीम की फॉर्म और रणनीति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।