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वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के ट्रायल का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें विंडो सीट पर रखे तीन गिलास पानी 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के बावजूद जरा भी नहीं हिले। इससे ट्रेन की बेहतर स्थिरता (stability) और अत्याधुनिक तकनीक की झलक मिलती है। इससे पहले ट्रायल का एक वीडियो लोको पायलट केबिन से रिकॉर्ड किया गया था, जिसे देखकर लोग भारतीय रेल की नई तकनीकी प्रगति की जमकर सराहना कर रहे हैं।
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वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के लॉन्च से पहले उसका एक और ट्रायल वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस बार वीडियो ट्रेन के पैसेंजर कोच के अंदर रिकॉर्ड किया गया, जहां विंडो सीट पर रखे पानी के गिलास 180 किमी प्रति घंटे की स्पीड पर भी स्थिर दिखाई दिए। इससे ट्रेन की स्मूदनेस और उन्नत इंजीनियरिंग की झलक मिलती है।
वंदे भारत स्लीपर एडिशन को BEML (भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड) ने ICF (इंटीग्रल कोच फैक्ट्री) की तकनीक से तैयार किया है। इसे विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा को अधिक आरामदायक और प्रीमियम अनुभव देने के लिए डिजाइन किया गया है। लॉन्च से पहले ही यह ट्रेन यात्रियों और रेलवे प्रेमियों के बीच बड़ी चर्चा का विषय बन गई है।
वंदे भारत की टेस्टिंग…
वंदे भारत के स्लीपर कोच की टेस्टिंग में विंडो सीट के पास 3 पानी से भरे गिलास रखे जाते हैं। इस दौरान सामने फोन में स्पीड आंकने वाला ऐप भी खुला होता है। जिसमें ट्रेन की रफ्तार 170 से 180 जा रही होती है। लेकिन पानी से भरे तीनों गिलास इस दौरान पूरी तरह स्थिर रहते हैं। जब व्यक्ति 2 गिलासों के ऊपर भी एक गिलास को रख देता है।
तब भी वह बेहद स्टेबल (स्थिर) नजर आ रहा होता है। करीब 47 सेकंड की यह फुटेज इसी के साथ खत्म हो जाते हैं। इससे पहले भी वंदे भारत के स्लीपर ट्रेन की लोको पायलट केबिन से एक वीडियो बनाया गया। जिसमें स्पीडोमीटर के ठीक सामने 3 गिलास पानी रखा होता है। मगर 180 की स्पीड में भी गिलास से 1 बूंद पानी नहीं छलकता।
180 पर भी Stable रहा गिलास
X पर @gemsofbabus_ नाम के यूजर ने यह वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा- टेस्टिंग के दौरान वंदे भारत स्लीपर ने 180 किमी प्रति घंटे की गति पकड़ी और पानी के तीन गिलास बिल्कुल स्थिर रहे। अब तक इस वीडियो को ढाई लाख के करीब व्यूज, साढ़े 8 हजार से ज्यादा लाइक्स और 300 से ज्यादा कमेंट्स मिल चुके हैं।
ये सच में बढ़िया है!
यूजर्स वंदे भारत की टेस्टिंग वाली इस वीडियो पर कमेंट सेक्शन में जमकर रिएक्शन दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा- यह अच्छी बात है। हालांकि, इन हाई-स्पीड ट्रेनों की असली क्षमता तभी साकार हो पाएगी जब रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में तीसरी और चौथी लाइनें बिछाई जाएंगी। पहले से ही अत्यधिक भीड़भाड़ वाली पटरियों के साथ, अगर आप इन ट्रेनों को बहुत जल्दी-जल्दी चलाते हैं, तो आपको नियमित एक्सप्रेस ट्रेनों को देरी से चलाना पड़ेगा।
दूसरे यूजर ने पूछा कि क्या यह ट्रेन इतनी तेज गति से ब्रेक लगा सकती है? इमरजेंसी ब्रेक लगाने की स्थिति में, क्या सीट बेल्ट न बांधे यात्रियों पर कोई असर पड़ेगा? एक अन्य यूजर ने कहा कि अब, रेलवे को इस गति को स्टैंडर्ड बनाने के लिए तेजी से काम करने की जरूरत है। न कि इसे सिर्फ परीक्षण के तौर पर दिखाने की… क्योंकि हकीकत में, वंदे भारत की औसत गति लगभग 80 किमी/घंटा ही है।






