अनिल अंबानी की एक साल पुरानी कंपनी में इस्तीफों की झड़ी, जानिए क्या है मामला


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अनिल अंबानी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। उनकी एक साल पुरानी कंपनी में इस्तीफों को झड़ी लग गई है। सीईओ और सीओओ के अलावा करीब एक दर्जन और एग्जीक्यूटिव्स ने भी कंपनी छोड़ दी है। यह सब तब हो रहा है जब अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों पर सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है।

Anil Ambani

नई दिल्ली: दिग्गज उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। उनकी कंपनी रिलायंस पावर के रिन्यूएबल एनर्जी वेंचर रिलायंस NU एनर्जीज में हालात ठीक नहीं हैं। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक लॉन्च होने के करीब एक साल के अंदर ही कंपनी के सीईओ मयंक बंसल और सीओओ राकेश स्वरूप ने इस्तीफा दे दिया है। ये दोनों ही रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की बड़ी कंपनी ReNew से आए थे। इन दोनों बड़े अधिकारियों के अलावा, करीब एक दर्जन और एग्जीक्यूटिव्स ने भी कंपनी छोड़ दी है।

यह सब तब हो रहा है जब अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों पर लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 7,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति फ्रीज की थी। इसमें ऑफिस, घर और 132 एकड़ से ज्यादा जमीन शामिल है। इंडस्ट्री के एक सूत्र ने बताया कि अनिल अंबानी ग्रुप में चल रही उथल-पुथल के कारण NU एनर्जी यूनिट से कई लोगों ने नौकरी छोड़ दी है। ऐसे में नए लोगों को ढूंढने में थोड़ा समय लग सकता है। मयंक बंसल और राकेश स्वरूप ने इस बारे में कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

नए वेंचर

हालांकि रिलायंस पावर के एक प्रवक्ता ने ईमेल के जरिए बताया कि मयंक बंसल और राकेश स्वरूप ने 30 सितंबर को इस्तीफा दिया था ताकि वे अपने खुद के नए बिजनेस शुरू कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ और कर्मचारियों ने भी स्वेच्छा से उनके साथ जाने का फैसला किया है। इन लोगों को बंसल और स्वरूप ही लाए थे और अब वे उनके नए वेंचर में शामिल होना चाहते हैं।

कंपनी का कहना है कि NU एनर्जी के पास अभी भी एक मजबूत इंटरनल लीडरशिप टीम और कुशल कर्मचारियों का समूह है। वे कई अनुभवी लोगों को कंपनी में लाने की प्रक्रिया में हैं ताकि संगठन को और मजबूत किया जा सके। कंपनी ने यह भी साफ किया कि प्रोजेक्ट्स पर काम पहले की तरह चल रहा है और मौजूदा टीम ही इसका नेतृत्व कर रही है।

चिंता का विषय

यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों पर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। ED ने हाल ही में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में उनकी काफी संपत्ति जब्त की है। यह घटनाक्रम रिलायंस NU एनर्जी के भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर रहा है, खासकर तब जब कंपनी अपनी क्लीन एनर्जी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में बड़े अधिकारियों का जाना और कंपनी की संपत्ति का फ्रीज होना, दोनों ही चिंता का विषय हैं।

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