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भारत की तेजी से हो रही प्रगति से चीन असहज है और वह इसे रोकने की कोशिश कर रहा है। चीन ने इलेक्ट्रिक वाहन, ऑटोमोबाइल और एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरी सेक्टर में भारत की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना को लेकर वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) में शिकायत दर्ज कराई है।

नई दिल्ली: चीन ने भारत की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना पर आपत्ति जताते हुए वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) में शिकायत दर्ज कराई है। चीन का कहना है कि भारत के ये कदम आयातित माल के मुकाबले देश में बने उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं, जिससे ‘चीन से आने वाले सामान के साथ भेदभाव’ होता है। चीन ने इसे ‘व्यापार नियमों का उल्लंघन’ बताया है।
WTO ने 20 अक्टूबर को बताया कि चीन ने इन मुद्दों पर भारत से बातचीत की जरूरत जताई है। चीन ने विशेष रूप से अडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरी, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स, तथा इलेक्ट्रिक कार उत्पादन को बढ़ावा देने वाली PLI योजनाओं पर सवाल उठाए हैं।
चीन की शिकायत की वजह
चीन ने यह शिकायत ऐसे समय में की है जब यूरोपियन यूनियन ने उनके तैयार किए गए इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर 27% टैरिफ लगा दिया है, और चीनी कंपनियां भारत में अपनी बिक्री बढ़ाने के तरीकों की तलाश कर रही हैं।
भारत ने जून 2021 में बैटरी स्टोरेज के लिए PLI स्कीम शुरू की थी, जिसमें कंपनियों को इनसेंटिव पाने के लिए दो साल के भीतर मैन्युफैक्चरिंग शुरू करनी होती है और कम से कम 25% घरेलू मूल्य संवर्धन करना होता है। इसी तरह, सितंबर 2021 में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए PLI योजना लागू हुई थी। मार्च 2024 में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भी एक नई योजना को मंजूरी मिली है।
चीन ने कहा है कि भारत के इन कदमों का मुख्य उद्देश्य वैश्विक निवेश को आकर्षित करना और देश में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाना है। हालांकि, भारत द्वारा दिए जाने वाले इंसेंटिव कुछ शर्तों पर आधारित हैं, जिनमें घरेलू मूल्य संवर्धन (डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन) शामिल है। ये शर्तें स्वदेशी उत्पादों पर खर्च को इंसेंटिव की पात्रता से जोड़े रखती हैं।






